rss 100th anniversary

  • सब तो एक-दूसरे से छिटके हुए!

    इन दिनों बेंगलुरू में आरएसएस की प्रतिनिधि सभा की बैठक हो रही है। आरएसएस के सौ साल होने के समय की इस बैठक के 1,480 प्रतिनिधियों और पदाधिकारियों के दिल-दिमाग का यदि मैं अनुमान लगाऊं तो सवाल होगा कि क्या नरेंद्र मोदी से इन सबका वह लगाव है, जो 2013-14 में उन्हें भाजपा का नेता तय करते वक्त था? यह गहरा-गंभीर सवाल है। मैं इसके खुलासे में नहीं जाऊंगा। इतना भर नोट करें कि परस्पर संवाद में भी एलर्जी है। अहंकार और परस्पर नफरत की वे बाते हैं, जो दिखावे की मुलाकातों तथा सत्ता के लालच से छुपी हुई हैं।...