आस लगाए बैठे हैं कई नेता

पता नहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी सरकार का विस्तार कब करेंगे, तब तक कई नेता आस लगाए बैठे हैं। ज्योतिरादित्य सिंधिया तो एक साल से ज्यादा समय से केंद्रीय मंत्री बनने की उम्मीद लगाए बैठे हैं। पिछले साल मार्च में उन्होंने कांग्रेस से दलबदल करा कर मध्य प्रदेश में भाजपा की सरकार बनवाई थी। उसके बाद से 14 महीने इंतजार में बीत गए। लंबे समय तक बीजू जनता दल में रहे बैजयंत जय पांडा भी दो बरस से ज्यादा समय से इंतजार कर रहे हैं। वे भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं और उनको भी उम्मीद है कि इस बार कैबिनेट विस्तार में मौका मिल सकता है। हालांकि वे अभी किसी सदन के सदस्य नहीं हैं। इसलिए उनको मंत्री बनाने के लिए कहीं से राज्यसभा सीट का इंतजाम भी करना होगा। बिहार के पूर्व उप मुख्यमंत्री सुशील मोदी को भी इंतजार करते हुए छह महीने हो गए। बिहार में जदयू और भाजपा की साझा सरकार बनी तो इस बार उनको उप मुख्यमंत्री नहीं बना कर राज्यसभा में भेजा गया। वे तब से मंत्री बनने का इंतजार कर रहे हैं। असम के पूर्व मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल भी राह देख रहे हैं। उनके पांच साल के कामकाज के नाम पर इस बार असम… Continue reading आस लगाए बैठे हैं कई नेता

मोदी मंत्रिमंडलः फेरबदल कब?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी सरकार में कब फेरबदल करेंगे? यह सवाल अब भाजपा नेताओं को परेशान करने लगा है। केंद्रीय मंत्रिमंडल में फेरबदल की अटकलें लगाते लगाते नेता अब थकने लगे हैं और इस बारे में बात करने से बचने लगे हैं। कई नेताओं को इंतजार तो फ्रस्ट्रेशन की हद तक पहुंच गया है। पर दूसरी ओर भाजपा के जानकार नेताओं का कहना है कि अमुक नेता मंत्री बनना चाहते हैं या अमुक नेता को मंत्री बनाने का वादा किया गया था, सिर्फ इसलिए मंत्रिमंडल में विस्तार नहीं किया जा सकता है। इसका मतलब है कि जिनको मंत्री बनना है वे बैठे इंतजार करें, जब सही समय आएगा तो विस्तार होगा। यह भी पढ़ें: सिंधिया, सुशील मोदी का लंबा इंतजार अब सवाल है कि सही समय कब आएगा? अब तो केंद्र सरकार के दो साल का जश्न भी मना लिया गया! पहले कहा जा रहा था कि सरकार के दो साल पूरे होने के मौके पर फेरबदल होगी। यह बात सरकार की पहली सालगिरह के समय भी कही गई थी लेकिन उससे ठीक पहले कोरोना वायरस की महामारी शुरू हो गई। तो क्या महामारी की वजह से सरकार में फेरबदल नहीं हो रही है? पार्टी के जानकार नेता इस बात… Continue reading मोदी मंत्रिमंडलः फेरबदल कब?

सिंधिया, सुशील मोदी का लंबा इंतजार

कांग्रेस छोड़ कर भाजपा में शामिल हुए ज्योतिरादित्य सिंधिया और बिहार छुड़ा कर केंद्र की राजनीति में लाए गए सुशील कुमार मोदी का इंतजार क्या खत्म होगा? सिंधिया पिछले साल मार्च से इंतजार कर रहे हैं। उनके और उनके समर्थकों का धीरज छूट रहा है तभी पिछले दिनों 21 मई को पूर्व प्रधानमंत्री दिवंगत राजीव गांधी की पुण्यतिथि के मौके पर सिंधिया ने उनको आधुनिक भारत का निर्माता बताते हुए ट्विट किया। यह भी पढ़ें: मोदी मंत्रिमंडलः फेरबदल कब? हालांकि बाद में उन्होंने ट्विट बदल दिया और आधुनिक भारत का निर्माता बताने वाली बात हटा दी। लेकिन उन्होंने मैसेज दे दिया कि उनको राजीव गांधी को आधुनिक भारत का निर्माता बताते देर नहीं लगेगी। वैसे भी मध्य प्रदेश में दमोह सीट के उपचुनाव में तमाम जोर लगाने के बाद भी भाजपा के हारने और कांग्रेस की जीत ने भाजपा की चिंता बढ़ाई है। सो, सिंधिया का इंतजार खत्म होने की संभावना दिख रही है। यह भी पढ़ें: तीन विधायक, केंद्रीय मंत्री के दावेदार! सुशील मोदी के लिए पिछले साल नवंबर से कहा जा रहा है कि उनको बिहार से दिल्ली इसलिए लाया गया है ताकि उनको मंत्री बनाया जा सके। वे मंत्री बनना तो तय मान रहे हैं पर ट्विटर… Continue reading सिंधिया, सुशील मोदी का लंबा इंतजार

तीन विधायक, केंद्रीय मंत्री के दावेदार!

देश के अलग अलग राज्यों के कम से कम तीन विधायक केंद्र सरकार में मंत्री बनने के दावेदार बताए जा रहे हैं। जानकार सूत्रों के मुताबिक असम के पूर्व मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल को केंद्र में मंत्री बनना है। यह भी कहा जा रहा है कि पार्टी आलाकमान की ओर से उनको हरी झंडी मिली हुई है। यह भी पढ़ें: मोदी मंत्रिमंडलः फेरबदल कब? ध्यान रहे वे नरेंद्र मोदी की पहली सरकार में मंत्री थे और 2016 का विधानसभा चुनाव जीतने के बाद पार्टी ने उनको असम का मुख्यमंत्री बनाया था। इस बार भी उनके मुख्यमंत्री रहते पार्टी जीती है पर उनकी बजाय हिमंता बिस्वा सरमा को सीएम बनाया गया है। तभी से सोनोवाल को एक बार फिर दिल्ली लाने की चर्चा तेज हो गई है। वैसे भी प्रदेश की राजनीति में उनके लिए करने को कुछ नहीं बचा है। हिमंता सरमा के मुख्यमंत्री बनने के बाद किसी के पास करने को कुछ नहीं बचा है। यह भी पढ़ें: सिंधिया, सुशील मोदी का लंबा इंतजार बहरहाल, सोनोवाल के अलावा एक और पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत हैं, जिनको पिछले दिनों ही हटाया गया था। वे एक बार फिर सक्रिय हो गए हैं और कहा जा रहा है कि केंद्र में मंत्री… Continue reading तीन विधायक, केंद्रीय मंत्री के दावेदार!

कौन-कौन बनेगा केंद्र में मंत्री?

दिल्ली में एक बार फिर गेसिंग गेम शुरू हो गया है कि केंद्र में कौन कौन मंत्री बनेगा। हालांकि सबको पता है कि नरेंद्र मोदी सरकार बनने के बाद किसी पद के लिए जिसके नाम की ज्यादा चर्चा हो जाती है उसका पत्ता कट जाता है। फिर भी कई तरह की अटकलें चल रही हैं। नेता एक-दूसरे से जानकारी ले और दे रहे हैं। किसी को पक्की खबर नहीं है पर राजनीतिक समीकरण और राज्यों में सामाजिक संतुलन के समीकरण के हिसाब से कुछ नामों की अटकलें लगाई जा रही हैं। यह भी पढ़ें: मोदी मंत्रिमंडलः फेरबदल कब? दिल्ली की अटकलों के हिसाब से असम से सर्बानंद सोनोवाल का नाम पक्का माना जा रहा है और पश्चिम बंगाल से मुकुल रॉय के बनने की संभावना जताई जा रही है। कहा जा रहा है कि भाजपा आलाकमान की नजर पूर्वी भारत पर है इसलिए असम, बंगाल, ओड़िशा से नए मंत्री जरूर बनेंगे। झारखंड से भी एक मंत्री बनना लगभग तय है। ध्यान रहे पार्टी राज्य में 12 सीटों पर जीती है और हमेशा दो मंत्री बनते रहे हैं, जिसमें से एक आदिवासी समुदाय से तो दूसरा गैर आदिवासी समुदाय से होता है। पिछली बार जयंत सिन्हा मंत्री थे। इस बार गैर… Continue reading कौन-कौन बनेगा केंद्र में मंत्री?

पूर्वोत्तर की चिंता में हिमंता को कमान

छह साल पहले कांग्रेस छोड़ कर भाजपा में शामिल हुए हिमंता बिस्वा सरमा को असम का मुख्यमंत्री बनाने का फैसला भाजपा के लिए आसान नहीं था। भाजपा ने वैचारिक प्रतिबद्धता की कसौटी को किनारे करके सरमा को मुख्यमंत्री बनवाया। भाजपा नेताओं को पता है कि सरमा की एकमात्र प्रतिबद्धता मुख्यमंत्री की कुर्सी है। आज वे भले बदरूद्दीन अजमल को गालियां देते हैं और उनके नाम पर ध्रुवीकरण की राजनीति करते हैं लेकिन एक समय था, जब कांग्रेस में रहते हुए हिमंता बिस्वा सरमा ने अजमल के साथ मिल कर तब के मुख्यमंत्री तरुण गोगोई की सत्ता पलटने का खेल रचा था। यह अलग बात है कि उसमें उनको सफलता नहीं मिली थी। सो, सरमा की वैचारिक प्रतिबद्धता और कुर्सी के लिए उनके मोह के बारे में जानते हुए भी भाजपा आलाकमान ने उनको मुख्यमंत्री बनवाया तो इसका कारण मजबूरी है। असम की भी मजबूरी और समूचे पूर्वोत्तर की चिंता में पार्टी ने उनको राज्य की कमान सौंपी है। जानकार सूत्रों का कहना है कि इस बार सरमा मुख्यमंत्री से कम किसी चीज पर राजी नहीं होने वाले थे। उन्होंने विधानसभा का चुनाव इसी शर्त पर लड़ा था कि चुनाव के बाद वे मुख्यमंत्री बनेंगे। अन्यथा उन्होंने चुनाव लड़ने से मना… Continue reading पूर्वोत्तर की चिंता में हिमंता को कमान

हिमंता होंगे मुख्यमंत्री, आज लेंगे शपथ

गुवाहाटी। छह साल पहले कांग्रेस छोड़ कर भाजपा में शामिल हुए हिमंता बिस्वा सरमा का दबाव आखिरकार रंग लाया और भाजपा आलाकमान ने उनको मुख्यमंत्री बनाने की हरी झंडी दे दी। शनिवार को दिल्ली में पार्टी के शीर्ष नेताओं के साथ उनकी और मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल की बैठक हुई थी। उसके बाद तीन केंद्रीय नेताओं की मौजूदगी में रविवार को गुवाहाटी में भाजपा विधायक दल की बैठक हुई, जिसमें सरमा को आम राय से विधायक दल का नेता चुना गया। वे सोमवार को 12 बजे अपने मंत्रिमंडल के साथ शपथ लेंगे। रविवार को हुई विधायक दल की बैठक में केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, पार्टी महासचिव अरुण सिंह और भाजपा के असम प्रभारी बैजयंत पांडा मौजूद थे। इससे पहले मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने राज्यपाल जगदीश मुखी को अपना इस्तीफा सौंप दिया था। सरमा और सोनोवाल शनिवार को ही दिल्ली में हाईकमान से मिल कर लौटे थे। दिल्ली में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्‌डा के आवास पर मीटिंग हुई थी, जिसमें गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा के संगठन महासचिव बीएल संतोष की मौजूदगी में नए मुख्यमंत्री के नाम पर चर्चा हुई। बताया जा रहा है कि उसी बैठक में सरमा के नाम पर सहमति बन गई थी। नेता चुने… Continue reading हिमंता होंगे मुख्यमंत्री, आज लेंगे शपथ

मोदी और शाह की मुश्किल?

भाजपा आलाकमान असम के मुख्यमंत्री पद का फैसला नहीं कर पा रही है। पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल और हिमंता बिस्वा सरमा दोनों को दिल्ली बुला कर बात की है। पिछले सात साल में यह दूसरा मौका है, जब नरेंद्र मोदी और अमित शाह को मुख्यमंत्री तय करने में मुश्किल आ रही है और कई समीकरणों का ख्याल रखना पड़ रहा है। इससे पहले दोनों ने जिसको चाह उसको कमान दी। झारखंड में रघुवर दास से लेकर हरियाणा में मनोहर लाल खट्टर और हिमाचल प्रदेश में जयराम ठाकुर से लेकर उत्तराखंड में त्रिवेंद्र सिंह रावत को मुख्यमंत्री बनाने का फैसला दोनों नेताओं ने चुटकियों में किया और पार्टी में किसी तरह से चूं कि आवाज नहीं आई। पहली बार दोनों को तब दिक्कत आई जब त्रिवेंद्र सिंह रावत को बदलना पड़ा। पार्टी के विधायकों के दबाव में दोनों को अपने चुने हुए मुख्यमंत्री को हटाना पड़ा। अब दूसरी बार ऐसा हो रहा है कि मोदी और शाह को मुख्यमंत्री तय करने में इतनी दिक्कत आ रही है। उनको हिमंता बिस्वा सरमा की ताकत का अंदाजा है और दोनों उनकी उपयोगिता भी जानते हैं। लेकिन मुश्किल यह है कि उनकी पृष्ठभूमि राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ या भाजपा वाली नहीं… Continue reading मोदी और शाह की मुश्किल?

New CM of Assam : कौन बनेगा मुख्यमंत्री? जानें कौन है रेस में सबसे आगे

Guwahati : BJP का असम में अगला मुख्यमंत्री कौन होगा, इसको लेकर अब तक कुथ भी कहना मुश्किल है. इस सस्पेंस  में कई नाम हैं जिन्हें इस पद का का प्रबल दावेदार माना जा रहा है. लेकिन अबतक BJP पार्टी की ओर किसी एक नाम पर मुहर नहीं लग सकी है.  इस लेकर सर्बानंद सोनोवाल और हिमंता बिस्व सरमा ने BJP अध्यक्ष जेपी नड्डा और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से कल मुलाकात की. कई बैठकों के दौर के बाद भी नए सीएम का नाम बाहर नहीं आ सका है. जानकारी के अनुसार  BJP विधायक दल की बैठक आज गुवाहाटी में होने जा रहा है.  उम्मीद की जा रही है कि अगली सरकार से संबंधित सभी सवालों के जवाब इस बैठक के बाद मिल जाएंगे.इस रेस में सबसे पहला नाम हिमंत बिस्व सरमा का बताया जा रहा है. आज बीजेपी विधायक दल की बैठक में सीएम के नाम पर लग सकती है मुहर. वर्तमान मुख्यमंत्री सोनोवाल और स्वास्थ्य मंत्री सरमा बुलाया था दिल्ली असम के वर्तमान मुख्यमंत्री सोनोवाल और स्वास्थ्य मंत्री सरमा को BJP केंद्रीय नेतृत्व ने राज्य में नेतृत्व के मुद्दे पर चर्चा के लिए दिल्ली बुलाया था. इस संदर्भ में शनिवार को दोनों नेताओं, नड्डा, शाह और BJP… Continue reading New CM of Assam : कौन बनेगा मुख्यमंत्री? जानें कौन है रेस में सबसे आगे

असम में दो गोगोई ने तीसरे गोगोई को रोका

असम में कांग्रेस पार्टी की सरकार बनती तो दो बार के सांसद गौरव गोगोई मुख्यमंत्री पद के दावेदार थे। उनके पिता तरुण गोगोई लगातार तीन बार राज्य के मुख्यमंत्री रहे थे और चुनाव से ठीक पहले उनका निधन हुआ था। उनकी वजह से गौरव गोगोई के लिए सहानुभूति भी थी और वे राहुल गांधी के करीबी भी हैं। लेकिन दो दूसरे गोगोई नाम वाले नेताओं ने उनके रास्ते में ऐसा फच्चर डाला कि कांग्रेस पिछली बार के प्रदर्शन में सुधार नहीं कर सकी। वैसे राज्य में कांग्रेस इस बार चुनाव जीतने के पूरे चांस थे और आंकड़े बता भी रहे हैं कि कांग्रेस जीत सकती थी अगर लुरिनजोत गोगोई और अखिल गोगोई ने फच्चर न डाला होता। ऑल असम स्टूडेंट यूनियन ने चुनाव से पहले असम जातीय परिषद नाम से एक पार्टी बनाई, जिसकी कमान लुरिनजोत गोगोई के हाथ में थी और कृषिक मुक्ति संग्राम के नेता अखिल गोगोई ने रायजोर दल के नाम से पार्टी बनाई। इन दोनों ने नागरिकता संशोधन कानून यानी सीएए के विरोध में भी आंदोलन चलाया था और यही कारण था कि इन्होंने असमी भाषा और संस्कृति के प्रति संवेदनशील उस वोट में सेंध लगाई, जो भाजपा का विरोध कर रही थी। वह वोट कांग्रेस… Continue reading असम में दो गोगोई ने तीसरे गोगोई को रोका

नड्डा, शाह से मिले सोनोवाल और सरमा

नई दिल्ली। असम में विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के एक हफ्ते बाद तक भारतीय जनता पार्टी मुख्यमंत्री का नाम नहीं तय कर पाई है। बाकी चार राज्यों में मुख्यमंत्रियों ने शपथ ले ली है। शनिवार को भारतीय जनता के नेता दिन भर असम के मुख्यमंत्री का नाम तय करने में बिजी रहे। मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल और मुख्यमंत्री पद के दावेदार हिमंता बिस्वा सरमा को पार्टी आलाकमान ने दिल्ली बुलाया था। दोनों नेताओं ने शनिवार को पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की। दिन भर चले मुलाकातों के सिलसिले के बाद भी मुख्यमंत्री के नाम का सस्पेंस बना हुआ है। बताया जा रहा है कि रविवार को गुवाहाटी में विधायक दल के नेता का नाम तय करने के लिए पार्टी की बैठक होगी। उससे पहले शनिवार को असम के दोनों नेताओं, सोनोवाल और सरमा ने भाजपा के वरिष्ठ नेताओं से इस मुद्दे पर लंबी चर्चा की। सोनोवाल और सरमा ने भाजपा के संगठन महासचिव बीएल संतोष से भी मुलाकात की। हिमंता बिस्वा सरमा ने जेपी नड्डा के आवास से बाहर आने के बाद शनिवार को कहा- भाजपा विधायक दल की बैठक कल को गुवाहाटी में हो सकती है। इस बैठक में सारे सवालों के… Continue reading नड्डा, शाह से मिले सोनोवाल और सरमा

अस्मिता की राजनीति कैसे करेगी भाजपा?

पश्चिम बंगाल के चुनाव नतीजों ने भारतीय जनता पार्टी की राजनीति की एक बड़ी फॉल्टलाइन जाहिर की है। यह फॉल्टलाइन भाजपा के साथ साथ राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ द्वारा पिछले कई दशकों से किए जा रहे प्रयासों की विफलता भी दिखाती है। वह विफलता यह है कि भाजपा के पास पश्चिम बंगाल में मतदाताओं के सामने पेश करने के लिए एक मजबूत और साख वाला चेहरा नहीं था। यही कहानी केरल की भी है, जहां संघ पिछले कई दशकों से पैर जमाने की कोशिश कर रहा है। असल में यह समूचे दक्षिण और पूर्वी भारत की कहानी है। इसके एकाध अपवाद होंगे लेकिन वास्तविकता यह है कि दक्षिण और पूर्वी भारत के ज्यादातर राज्यों में भाजपा के पास नेतृत्व की कमी है। इसी वजह से भाषायी अस्मिता की राजनीति वाले राज्यों में भाजपा को मुश्किलें आती रहेंगी। ऐसा नहीं है कि भाजपा ने पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री पद का दावेदार पेश नहीं किया, इसलिए यह माना जाएगा कि उसके पास चेहरा नहीं है। मुख्यमंत्री का दावेदार तो उसने कई राज्यों में पेश नहीं किया, लेकिन उन राज्यों में भाजपा यह कहने की स्थिति में थी कि उसके पास एक से ज्यादा मजबूत चेहरे हैं, मुख्यमंत्री बनने के लिए। यह बात वो… Continue reading अस्मिता की राजनीति कैसे करेगी भाजपा?

मोदी ने असम के मुख्यमंत्री से बात की

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने असम के मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल से राज्य में वैश्विक महामारी कोविड-19 और बाढ़ की स्थिति की पूरी जानकारी ली

असम में सोनोवाल की दिक्कत

इसे समय का फेर कहा जाए या सत्ता लोलुपता क्योंकि जिस आंदोलन ने एक नेता को इतना लोकप्रिय बना दिया था कि उसे लोग कभी असम में जातीय नायक कहने लगे थे आज वह उसी मुद्दे पर लोगों के आंदोलन बन जाने के कारण बहुत बदनाम हो गया है और लोगों द्वारा कोसा जा रहा है। एक समय था जब असम के मौजूदा मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल राज्य में बांग्लादेश से आए अवैध शरणथियों के खिलाफ छेड़े गए आंदोलन के कारण वे भी सुर्खियो में आए थे। तब आसू ने असमी लोगों की संस्कृति, भाषा व पहचान के मुद्दे पर अपना आंदोलन छेड़ा था। इस आंदोलन की एक बड़ी वजह यह भी रही कि लगातार होने वाली अवैध घुसपैठ के कारण असम के मूल निवासियों को संख्या काफी कम हो गई थी वो मात्र 48 फीसदी रह गए थे व विदेशी बांग्लादेशी बहुमत का खतरा बनने लगे थे। उन्हें अपनी पहचान खो देने का खतरा पैदा होने लगा व इसके आधार पर 1979 में असम मे आंदोलन शुरू हुआ था। इसमें 860 लोगों की जाने गईं व काफी मात्रा में संपत्ति को नुकसान पहुंचा। अंतः केंद्र सरकार ने उनके हितो व अधिकारों की रक्षा के लिए असम समझौता किया। तब से… Continue reading असम में सोनोवाल की दिक्कत

हिमंता सरमा पर सबकी नजर

अगर असम में आंदोलन ठंडा नहीं पड़ता है तो मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। बताया जा रहा है कि पार्टी आलाकमान ने असम के हालात को लेकर गंभीरता से चर्चा की है। ध्यान रहे जब से नागरिकता कानून पर पूर्वोत्तर में आंदोलन शुरू हुआ है तब से सोनोवाल ज्यादा सक्रिय नहीं हैं।

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