संयोग, प्रयोग या साजिश है?
जिस समय मंडल आयोग की रिपोर्ट लागू हुई या जिस समय अयोध्या का आंदोलन चला और साधु, संतों पर गोलियां चलीं उस समय सोशल मीडिया नहीं था, निजी टेलीविजन चैनल नहीं थे और अखबारों की पहुंच भी सीमित थी। इसलिए जिनको लड़ना पड़ा, सड़क पर उतर कर लड़ना पड़ा। आज मीडिया और सोशल मीडिया के जमाने में वही लड़ाई नैरेटिव के स्तर पो रही है। अगर इस फैक्टर को विश्लेषण में शामिल करें तो कह सकते हैं कि यूजीसी के नए नियमों और प्रयागराज के कुंभ मेले में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के साथ हुए बरताव पर वैसी ही या उससे ज्यादा...