Sonia Gandhi Book

  • अज़ीब मुकाम है यह!

    सोनिया गांधी अपने अनुभव सुनाना चाहती हैं, तो आखिर उसका अवसर उन्हें क्यों नहीं मिलना चाहिए? अगर उनकी टिप्पणियां पूर्वाग्रह भरी हुईं, तो उनसे आहत पक्ष के पास जवाब देने का पूरा अवसर मौजूद रहेगा। कहने को तो भारत लोकतंत्र है, लेकिन यहां विपक्ष के सर्व-प्रमुख नेताओं तक को अपनी कहानी बताने की आजादी नहीं है! सोनिया गांधी नरेंद्र मोदी या आरएसएस के बारे में अपने अनुभव या अपनी राय सुनाना चाहती हैं, तो आखिर उसका अवसर उन्हें क्यों नहीं मिलना चाहिए? भारत- चीन संबंध से जुड़ी किसी घटना पर उनकी राय को देश के सामने आने से क्यों रोका...