ये जो चुनाव हुआ
पहले चुनाव बिल्कुल दोषमुक्त होते थे ऐसा नहीं कहा जा सकता। लेकिन तब उन्हें ऐसे युद्ध की तरह भी नहीं लड़ा जाता था, जिसमें विरोधी को समूल नष्ट कर देने की भावना हो। कभी चुनाव को लोकतंत्र का उत्सव समझा जाता था। तब चुनाव बिल्कुल दोषमुक्त थे या वे पूरी तरह स्वतंत्र एवं निष्पक्ष ढंग से आयोजित होते थे, ऐसा नहीं कहा जा सकता। लेकिन तब उन्हें ऐसे युद्ध की तरह भी नहीं लड़ा जाता था, जिसमें विरोधी को समूल नष्ट कर देने की भावना हो। अब ऐसा ही नजारा खास कर वैसे राज्य में देखने को मिलता है, जहां...