street dog

  • आज मेरी गली के रुस्तम की बात!

    सन्नाटा और आसमान भारी और हवा नमी से लदी हुई। इन दिनों सुबह भी ठहरी सी होती है। न अखबार के हॉकर का इंतजार होता है और न दूधवाले की या ब्रेड-अंडा बेचने वाले की घंटी या टनटनाहट!  अब तो ब्लिंकिट के ईवी साईकिल की घर्राहट होती है। डिलीवरी बॉय उतरता है, हाथ में झूलता काग़ज़ का थैला—दूध, ब्रेड, अंडे जैसे सुबह के ज़रूरी सामान। वह दो कदम भी नहीं चला होता कि रुस्तम आ टपकता है! कहाँ से? जैसे परछाईं से निकला हो। अचानक झपट, तेज़, गूँजती भौंक जो कॉलोनी की दीवारों से टकराकर लौटती हैं। ब्लिंकिट का डिलीवरी...