निजी अस्पतालों का यही हाल

अस्पतालों के ऐसे तौर-तरीकों के कारण मेडिकल प्रोफेशन में लोगों का भरोसा खत्म हो जा रहा है। तथ्य यह सामने आया है कि प्राइवेट सेक्टर आधारित इलाज व्यवस्था लोगों की सेहत और चिकित्सा का ख्याल रखने में विफल है। ये बात भारत के लिए भी उतनी ही सच है, जितनी अमेरिका के लिए। निजी अस्पतालों का यही हाल : प्राइवेट अस्पताल चाहे भारत में हों या अमेरिका में उनका चरित्र एक जैसा ही है। वे कहने को भले चैरिटी के लिए बनते हों और इस नाम पर सरकारों से सुविधाएं ले लेते हों, लेकिन असल में उनकी नजर में मुनाफे से बड़ा कुछ और नहीं होता। इसी बात की पुष्टि हाल में अमेरिका की जॉन्स हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी (जेएचयू) के इस अध्ययन से हुई। इसके मुताबिक कुछ सबसे ज्यादा कमाई वाले अस्पतालो ने अपने यहां इलाज कराने की फीस इलाज पर असल में आने वाली लागत से दस गुना तक तय कर रखी है। गौरतलब है कि अमेरिका में अस्पतालों को अपनी फीस और चिकित्सा संबंधी तमाम शुल्क खुद तय करने का अधिकार है। अध्ययनकर्ताओं ने पाया कि जिन लोगों ने मेडिकल बीमा करा रखा है, उनकी तरफ से बीमा कंपनी अस्पतालों से सौदेबाजी कर लेती है। इस कारण उन्हें व्यवहार… Continue reading निजी अस्पतालों का यही हाल

सब्र रखिये हम भी कोरोना फ्रेंडली हो जाएंगे-स्टडी

भारत सवा साल से कोरोना वायरस लड़ रहा है। और इस पर हर दिन अलग-अलग शोध और स्टडी होती रहती है। यब वायरस दिन-प्रतिदिन अपना रूप बदल रहा है। वर्तमान समय में कोरोना मजबूत होता जा रहा है और अपना अलग-अलग रूप सामने ला रहा है। अभी वैज्ञानिक कोरोना को जितना शक्तिशाली बता रहे एक स्टडी में सामने आया है कि कोरोना वायरस भविष्य में सर्दी-झुकाम बनकर रह जाएगा। अगले दशक तक कोविड-19 के लिए जिम्मेदार कोरोना वायरस सामान्य सर्दी-जुकाम वाला वायरस रह जाएगा। एक अध्ययन में यह कहा गया है. शोध पत्रिका ‘वायरसेस’ में प्रकाशित एक अध्ययन में गणितीय मॉडल के आधार पर लगाए गए अनुमान में कहा गया है कि मौजूदा महामारी के दौरान मिले अनुभवों से हमारा शरीर प्रतिरक्षा तंत्र में बदलाव कर लेगा।   इसे भी पढ़ें Corona Third Wave : अगर कोरोना की तीसरी लहर आई तो कितनी खतरनाक होगी ये लहर?? वायरस में बदलाव के करारण बीमारी का गंभीरता कम हो जाएगी अमेरिका में यूटा विश्वविद्यालय में गणित और जीव विज्ञान के प्रोफेसर फ्रेड अडलेर ने कहा कि यह एक संभावित भविष्य को दर्शाता है, जिसके समाधान के लिए अभी तक तमाम कदम नहीं उठाए गए हैं। अडलेर ने कहा कि आबादी के बड़े हिस्से… Continue reading सब्र रखिये हम भी कोरोना फ्रेंडली हो जाएंगे-स्टडी

कोरोना अपडेट : कोरोना से बचने के लिए कौन सा मास्क है बेहतर,जानें विशेषज्ञों की राय…

कोविड-19 ने पूरे देश में अपना आतंक फैला रखा है। भारत में कोरोना की दूसरी लहर का प्रकोप चल रहा है। कोरोना की दूसरी लहर पहली लहर से कई गुना खतरनाक है। दूसरी लहर में कोरोना का म्यूटेट वायरस हैं। ऐसे में लोगो का अपना और दूसरों का ज्यादा ध्यान रखना चाहिए। हम देखते है कि कई लोग मास्क लगाते है तो कई नहीं लगाते हैं।बाजार में हम देखते है कि ज्यादातर लोग कपड़े के मास्क का उपयोग करते हैं।  ऐसे में लोग ये जानने को इच्छुक है कि इस महामारी बचने के लिए कौनसा मास्क लगाये। क्योंकि कोरोना काल में जनता बाहर भी निकलती है। तो कौनसे मास्क से वायरस से बचा जा सकता है।  मेडिकल जर्नल ‘द लैंसेट’ में प्रकाशित स्टडी में यह दावा किया गया है कि कोरोना वायरस के हवा में फैलने की आशंका है। तब से यह सवाल अहम हो गया है कि कौन सा मास्क वायरस से बचा सकता है । कपड़े के मास्क से वायरस से बचा जा सकता है या फिर एन-95 से..। मैरीलैंड स्कूल ऑफ मेडिसिन के डॉ. फहीम यूनुस ने इस सवाल का जवाब देने का प्रयास किया है। उन्होंने कोरोना की दूसरी लहर से बचने के लिए N95 या… Continue reading कोरोना अपडेट : कोरोना से बचने के लिए कौन सा मास्क है बेहतर,जानें विशेषज्ञों की राय…

दोपहर की झपकी आपकी कामकाजी याददाश्त को बढ़ा सकती है

एक नियमित दोपहर की झपकी लेने से आपके मस्तिष्क को तेज रखा जा सकता है, क्योंकि एक नए अध्ययन से पता चलता है कि दोपहर की झपकी लेना बेहतर मानसिक चपलता से जुड़ा है।

तनाव में क्यों जवान?

मंगलवार को सेना प्रमुख मनोज मुकुंद नरवणे ने जवानों में तनाव के मुद्दे पर भी प्रतिक्रिया दी। कहा कि पिछला साल चुनौतियों से भरा था। कोरोना महामारी की चुनौती थी, तो दूसरी तरफ देश के उत्तरी सीमाओं पर प्रतिकूल स्थिति पैदा हुई।

जरूरत है जागरूकता की

एक नई शोध का नतीजा परेशान करने वाला है। आज के माहौल में इस पर चर्चा कम ही होगी, लेकिन ऐसी बातों को हम सिर्फ खुद के लिए जोखिम मोल लेते हुए नजरअंदाज कर सकते हैं। स्वास्थ्य की चेतना अगर समाज में हो, तो ऐसी सूचनाएं बेहद गंभीर मानी जाएंगी

दुनिया ने आखिर क्या सीखा?

दिल्ली की हवा फिर से खराब हो गई है। यह महज नमूना भर है कि अब जबकि लॉकडाउन के बाद आम गतिविधियां बहाल हो रही हैं, तो फिर पर्यावरण का क्या हाल होने जा रहा है। यह सच है कि लॉकडाउन से और चाहे जो नुकसान हुआ हो, लेकिन पर्यावरण का इससे भला हुआ था

करोड़ों साल पहले सांप के थे पैर व गाल में हड्डियां

एक अध्ययन में यह साबित हुआ है कि आज से करीब 10 करोड़ साल पहले सांप के पैर थे व उनके गाल में हड्डियां भी मौजूद थी। लेकिन आज के सांप के पैर व हड्डियां गायब हो चुकी है।

कॉफी पीने से खेल प्रदर्शन में सुधार होता है: सर्वे

ब्रिटेन में कोवेंट्री विश्वविद्यालय के एक अध्ययन में पता चला है कि कॉपी पीने से महिला पुरुष दोनों के खेल प्रदर्शन में सुधार होता है। शोधकर्ताओं ने पाया है कि कॉफी पीना पुरुषों और महिलाओं दोनों के खेल प्रदर्शन में सुधार के साथ जुड़ा हुआ है।

भारत में 2050 तक बाढ़ का खतरा ज्यादा बढ़ेगा

अमेरिकी एनजीओ ‘क्लाइमेट सेंट्रल’की तरफ से किए गए इस अध्ययन में कहा गया कि भारत में 2050 तक करीब 3.6 करोड़ लोगों के हर साल बाढ़ की चपेट में आने का खतरा होगा।

और लोड करें