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काबुल गढ़े नया इस्लामी लोकतंत्र

अफगानिस्तान की तालिबान सरकार को एकदम मान्यता देने को कोई भी देश तैयार नहीं दिखता। इस बार तो 1996 की तरह सउदी अरब और यूएई ने भी कोई उत्साह नहीं दिखाया।

तालिबान की कच्ची-पक्की खिचड़ी

राष्ट्रपति अशरफ गनी को काबुल से भागे अब 20 दिन होने को आ गए लेकिन अभी तक नई सरकार की घोषणा नहीं हुई है।

न खुदा मिला न विसाले सनम!

अमेरिका को अफगानिस्तान में क्या मिला? धोखा, हार और बदनामी! राष्ट्रपति जो बाइडेन कह रहे हैं कि अमेरिका के साथ धोखा हुआ। दूसरी ओर दुनिया कह रही है कि अमेरिका हार कर भाग गया

धर्म व राजनीति के घातक घालमेल की मिसाल तालिबान

धर्म और राजनीति बिल्कुल अलग मामले हैं। एक दूसरे के साथ मिलकर दोनों दुषित हो जाते हैं। बात अफगानिस्तान में तालिबान की हो रही है इसलिए यहां यह देखना भी जरूरी है कि दुनिया में इतने मुस्लिम मुल्क हैं पर इ

तालिबानियों से औरतों पर संकट, काबुल के पार्क से लापता हुई 100 से ज्यादा महिलाएं

दिल्ली में रहने वाले अफगान मूल के एक नागरिक का कहना है सिटी के मशहूर शहर-ए-नवा पार्क (Shahar E Nava Park) में मौजूद महिलाएं अफगानिस्तान के सैनिकों और तालिबानी आतंकवादियों के बीच छिड़े युद्ध से बचने के लिए गांव छोड़कर यहां आईं थी।

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