ओह! टाटा, मोदी-शाह की लगी नजर!
बहुत खराब है। वैश्विक पैमाने पर भारत के सर्वाधिक पुराने इकलौते औद्योगिक ब्रांड की मोदी-शाह कब्र खोदते-खोदते उसे अब उस मुकाम पर ले आए हैं कि यदि तीन-चार वर्ष मोदी और प्रधानमंत्री रह लिए तो कोई गुजराती न केवल टाटा ब्रांड का मालिकाना लिए हुए होगा, बल्कि टाटा समूह भी व्यापार-धंधे का वह कारोबारी होगा जो दिल्ली की सत्ता के आगे वैसी ही क्रोनी पूंजीवादी पहचान लिए हुए होगा जैसे अडानी-अंबानी लिए हुए हैं। और मेरा मानना है कि मोदी-शाह ने सन् 2014 से भारत राष्ट्र-राज्य के नागरिक जीवन, लोकतंत्र, उसकी संस्थाओं, मर्यादाओं, चाल-चेहरे-चरित्र, विश्वविद्यालयों, अकादमियों, नौकरशाही-कार्यपालिका, मीडिया, न्यायपालिका, संसद,...