उच्च सदन का यह उद्देश्य तो नहीं था
भारतीय जनता पार्टी ने उत्तर प्रदेश की आठ राज्यसभा सीटों के लिए सोमवार, पांच अक्टूबर को जब उम्मीदवारों के नाम का ऐलान किया तो चौतरफा इस बात की चर्चा थी कि इससे कैसे भाजपा ने चुनाव का सामाजिक समीकरण साधा है। हर जगह प्रमुखता से यह बताया गया कि इन आठ में तीन पिछड़ी जाति के हैं, दो दलित समुदाय के हैं, दो ब्राह्मण हैं और एक ठाकुर समाज के हैं। उच्च सदन में जाने के लिए इसके अलावा उनकी क्या योग्यता है यह बताने की जरुरत किसी ने नहीं समझी। ध्यान रहे संविधान के अनुच्छेद 80 के तहत उच्च...