नेपाल-चीन सीमा क्षेत्र में बुधवार को आयी विनाशकारी बाढ़ के बाद 1,300 से अधिक लोग अब भी लापता हैं और 160 से ज्यादा लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है।
बाढ़ ने सड़कों, पुलों और अन्य बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचाया है, जबकि कई इलाके संपर्क से कटे होने के कारण बचाव दलों को प्रभावित लोगों तक पहुंचने में मुश्किल हो रही है।
नेपाली अधिकारियों के अनुसार, नेपाल की ओर 826 लोग लापता हैं, जिनमें कम से कम 300 विदेशी नागरिक शामिल हैं। वहीं चीन के तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र के ग्यिरोंग काउंटी में 558 लोगों के लापता होने की सूचना है। दोनों देशों के आंकड़ों को मिलाकर लापता लोगों की संख्या कम से कम 1,384 हो गयी है। अधिकारियों ने हालांकि कहा कि संचार व्यवस्था बहाल होने और बचाव दलों के प्रभावित इलाकों तक पहुंचने के साथ यह आंकड़ा बदल सकता है।
यह आपदा बुधवार को उस समय आयी जब पहाड़ी घाटियों में पानी, मलबे और कीचड़ के तेज प्रवाह ने घरों, वाहनों और व्यावसायिक इमारतों को अपनी चपेट में ले लिया और कई बस्तियां तबाह हो गयीं।
स्थानीय मीडिया ने बताया कि भोटेकोशी की सहायक नदी ल्हेंदे के प्रवाह के हिमस्खलन से अवरुद्ध होने के बाद अचानक पानी का भारी दबाव बना और बाढ़ ने सबसे पहले चीन की सीमा से लगे रसुवा जिले के तिमुरे क्षेत्र को अपनी चपेट में लिया। सैकड़ों लोगों की आबादी वाला यह इलाका देखते ही देखते बह गया और इसके बाद बाढ़ का पानी नीचे की ओर बढ़ गया। क्षेत्र में बारिश नहीं होने के कारण लोगों को किसी बड़ी बाढ़ की आशंका नहीं थी और वे रोजमर्रा के काम में लगे थे।
बाढ़ के कारण पुलों के ढहने, सड़कों के मलबे में दबने और लगातार भूस्खलन से राहत एवं बचाव कार्य बुरी तरह प्रभावित हुआ है। चीन की ओर आपातकालीन दल करीब 22 घंटे बाद ग्यिरोंग बंदरगाह पहुंचे। खराब मौसम और अवरुद्ध सड़कों के कारण उन्हें पहुंचने में देरी हुई। चीनी सरकारी मीडिया के अनुसार, 141 बचावकर्मियों का पहला दल बंदरगाह पहुंचा और एक ऊंचाई वाले क्षेत्र में काम करने वाला एमआई-171 हेलीकॉप्टर भी तैनात किया गया।
ग्यिरोंग बंदरगाह की ओर जाने वाली सड़क का करीब 1.5 मीटर हिस्सा मलबे में दबा है। बंदरगाह से करीब 2.5 किलोमीटर पहले से रास्ता अवरुद्ध है। बाढ़ के पानी ने सीमा परिसर की एक सरकारी इमारत समेत आसपास के इलाकों को अपनी चपेट में ले लिया।
नेपाल में सड़क और पुलों के तबाह होने के कारण प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचने के लिए हेलीकॉप्टरों पर निर्भरता बढ़ गयी है। सीएनएन की एक रिपोर्ट में नेपाली सांसद सुमनिमा उदास के हवाले से कहा गया कि सेना ने उपलब्ध सभी हेलीकॉप्टरों को तैनात किया है और निजी हेलीकॉप्टर संचालकों की भी मदद ली जा रही है। राहत सामग्री लेकर भेजे जा रहे ट्रक भी कई स्थानों पर सड़कें नष्ट होने के कारण अपने गंतव्य तक नहीं पहुंच पा रहे हैं।
प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार बाढ़ में नौ जलविद्युत परियोजनाएं और नौ वाणिज्यिक बैंकों की शाखाएं तबाह हो गयी हैं। इसके अलावा 19 मोटर योग्य पुल और करीब 40 किलोमीटर राजमार्ग बह गये हैं। निजी और सरकारी संपत्ति को हुए कुल नुकसान का अभी आकलन नहीं हो सका है।
Also Read : नेपाल बाढ़: वायु सेना के विमान राहत सामग्री ले जाने के लिए तैयार
बाढ़ में जलविद्युत परियोजनाओं, बैंकों, सीमा शुल्क कार्यालयों और अन्य प्रतिष्ठानों में काम करने वाले कई लोग भी लापता हैं। प्रभावित क्षेत्र में फंसे विदेशी पर्यटकों की तलाश के लिए भी अभियान चलाया जा रहा है।
शोधकर्ताओं ने यह संभावना भी जतायी है कि ग्लेशियर का हिस्सा टूटकर घाटी में गिरा हो, जिससे भूस्खलन शुरू या और अधिक गंभीर हुआ हो। बाढ़ में भूस्खलन और संभावित ग्लेशियर टूटने की भूमिका का पूरा आकलन अभी बाकी है।
भारत ने नेपाल के लिए राहत और मानवीय सहायता बढ़ा दी है। भारत की ओर से गुरुवार को 37.5 टन राहत सामग्री, दवाइयां और खाद्य पैकेट लेकर दूसरी उड़ान नेपाल भेजी गयी। इससे पहले बुधवार को भारत ने 10 टन राहत सामग्री भेजी थी। राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) की एक टीम को फिलहाल नेपाल नहीं भेजा गया है, हालांकि टीमें तैयार रखी गयी हैं।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह से बात कर जनहानि पर दुख जताया और कहा कि भारत नेपाल को हरसंभव मानवीय सहायता देने के लिए तैयार है। नेपाल और चीन में स्थित भारतीय दूतावासों ने प्रभावित भारतीय नागरिकों की जानकारी और सहायता के लिए हेल्पलाइन भी स्थापित की हैं।
बाढ़ से ग्यिरोंग बंदरगाह को भी नुकसान पहुंचा है, जो 2024 में चीन-नेपाल के बीच होने वाले व्यापार के करीब एक-तिहाई हिस्से को सुगम बनाता था। इस क्षेत्र में पिछले वर्ष भी बाढ़ से ग्यिरोंग पुल क्षतिग्रस्त हुआ था और उसने 2026 की शुरुआत में ही काम करना शुरू किया था।
इस बीच, पूर्व एनडीआरआरएमए प्रमुख अनिल पोखरेल ने कहा कि नेपाल और चीन के बीच ऐसी आपदाओं के लिए सूचना साझा करने की व्यवस्था को मजबूत करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि सरकार को केवल आपदा के बाद राहत और बचाव तक सीमित रहने के बजाय ऐसी व्यवस्था बनानी चाहिए जिससे समय रहते लोगों की जानें बचायी जा सके।
बाढ़ के बाद नेपाल के जल तथा मौसम विज्ञान विभाग और चीन के मौसम प्रशासन के अधिकारियों के बीच बुधवार को ऑनलाइन बैठक हुई। इसके बाद चीन ने सहमति जताई कि अपनी ओर पानी का स्तर बढ़ने पर वह नेपाल को तत्काल सूचना देगा।
नेपाल और चीन ने 2019 में आपदा जोखिम न्यूनीकरण और आपात प्रतिक्रिया में सहयोग के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किये थे। इसमें सूचना साझा करने, प्राकृतिक आपदाओं की निगरानी, प्रशिक्षण और आपदा जोखिम न्यूनीकरण परियोजनाओं समेत नौ क्षेत्रों में सहयोग का प्रावधान है।
Pic Credit : ANI
Leave a comment
You must be logged in to post a comment.




