Aadyaguru Shankaracharya Jayanti

  • सांस्कृतिक पुनर्जागरण के युगपुरुष आद्य शंकराचार्य

    भारतीय वाङ्मय के आकाश में आद्य गुरु शंकराचार्य एक ऐसे उज्ज्वल सूर्य हैं, जिन्होंने अल्पायु में ही अपनी प्रतिभा से चारों दिशाओं को आलोकित किया। वैशाख शुक्ल चतुर्थी को उनका जन्म केवल एक घटना नहीं, बल्कि क्षीण होते सनातन धर्म के पुनरुत्थान का एक दिव्य अभियान था। शंकराचार्य का आध्यात्मिक दर्शन “ब्रह्म सत्यं जगन्मिथ्या जीवो ब्रह्मैव नापरः” के सूत्र में समाया है। उन्होंने उपनिषदों की जटिल व्याख्याओं को प्रस्थानत्रयी पर भाष्य लिखकर स्पष्ट और तार्किक रूप दिया। पौराणिक मान्यता के अनुसार वे भगवान शंकर के अंशावतार माने जाते हैं, जिन्होंने षण्मत की स्थापना कर विभक्त शैव, वैष्णव और शाक्त परंपराओं...