ancient India

  • प्राचीन भारत में मानव बंधुत्व की अवधारणा

    ऋग्वेद का यह मंत्र सहयोग, संवाद और एकजुट संकल्प के महत्व पर बल देता है। यह बताता है कि समाज की प्रगति तभी संभव है, जब लोग विभाजन के बजाय एक समुदाय के रूप में एक साथ सोचें और एक ही उद्देश्य के लिए कार्य करें। ठीक उसी प्रकार जैसे प्राचीन ऋषि और देवता मिलकर कार्य करते थे और सुख प्राप्त करते थे। भारतीय परंपरा में मानव बंधुत्व को केवल सामाजिक व्यवस्था नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक और नैतिक अनिवार्यता माना गया है। इसमें यह विश्वास निहित है कि समस्त मानवता एक ही मूल से उत्पन्न हुई है और एक ही...