आयुर्वेद और कानून की अनदेखी करते नीमहकीम!
मरीज को भी सतर्क होना चाहिए। अगली बार जब आप ऐसे किसी विज्ञापन के बाद किसी उपचार केंद्र में जाएँ तो उपाधि मत पूछिए, रजिस्ट्रेशन पूछिए। चमत्कार मत पूछिए, लिखित निदान और सूचित सहमति पूछिए। जो व्यक्ति कैमरे पर देश का वैद्य बनते हों और असल में केवल मैट्रिक पास या स्नातक हों, वह आचार्य या गुरु तो हो सकता है, चिकित्सक नहीं। आयुर्वेद भारत की ज्ञान-परंपरा है, कोई टीवी-शीर्षक नहीं। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में एक नया उद्योग तेजी से बढ़ा है, कैमरे के सामने बैठकर गंभीर बीमारियों को ‘उलटने’ का वादा करने वाले स्व-घोषित ‘आयुर्वेदाचार्य’। इनमें कई चेहरे...