चुप्पी की छटपटाहट: ‘बयान’
फ़िल्म का सबसे भयावह पहलू उसका ‘विलेन’ नहीं, बल्कि उसका पूरा ‘सिस्टम’ है, जिसमें पंथ, सत्ता और ‘खामोश हिंसा’ अपने अपने अनुपात में मौजूद हैं। पंथ नेता का किरदार जिसे चंद्रचूड़ सिंह ने बेहद संयमित और सधे तरीके से निभाया है, किसी पारंपरिक खलनायक की तरह नहीं है। वह चिल्लाता नहीं, हिंसक नहीं दिखता लेकिन उसका प्रभाव सर्वव्यापी है। सिने -सोहबत हिंदी सिनेमा में कुछ फ़िल्में केवल देखी नहीं जातीं, बल्कि उन्हें महसूस किया जाता है। ऐसी फ़िल्में हमारे भीतर उतरती हैं और एक असहज चुप्पी छोड़ जाती हैं। लेखक-निर्देशक बिकास रंजन मिश्रा की फ़िल्म 'बयान' ऐसी ही एक सिनेमाई...