‘बांडुंग भावना’ से प्रेरित ब्रिक्स+
विकासशील देशों के नेतृत्व को भी अमेरिकी साम्राज्य की आक्रामक नीतियां झेलनी पड़ी हैं। इसके बीच ब्रिक्स+ उम्मीद का मंच है, जो आपसी सहयोग से संप्रभु एवं आत्म-निर्भर विकास में सहायक बन सकता है। अतः कहा जा सकता है कि जिन ठोस परिस्थितियों के कारण ब्रिक्स+ अस्तित्व में आया और क्रमिक रूप से उसकी सकारात्मक भूमिका बनी, वही उसकी प्रगति को भी रफ्तार देंगी- यह उम्मीद रखने की ठोस वजहें हैं। ब्रिक्स+ का खुद को बांडुंग की विरासत से जोड़ने का प्रयास महत्त्वपूर्ण है। 12-13 सितंबर को हुए नई दिल्ली शिखर सम्मेलन के दौरान जारी साझा घोषणापत्र में ब्रिक्स+ ने...