बाबू बनाम विशेषज्ञ की बहस

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सरकारी बाबू यानी अफसरशाही बनाम विशेषज्ञता की बहस छेड़ दी है। उन्होंने 11 फरवरी को संसद में भाषण देते हुए सरकारी बाबुओं की काबिलियत पर सवाल उठाए।

बाबुओं छोड़ो सब और बेचों खरबपतियों को!

भारत की नौकरशाही याकि आईएएस बाबुओं की फौज को बुधवार को भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में जो आईना दिखाया वह आजाद भारत की इतिहासजन्य घटना है।

जयराम नहीं बना सके अफसरशाही पर पकड़: कांग्रेस

हिमाचल प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष कुलदीप सिंह राठौर ने कहा है कि मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर पिछले दो सालों में अफसरशाही पर पकड़ नहीं बना पाए है।

अंग्रेज की कोख से है नौकरशाही

जैसे नेहरू-पटेल थे वैसे मोदी-शाह है, ऐसा होना उस क़ॉमन कड़ी, उस तासीर, उस तंत्र से है जिसका नाम नौकरशाही है। सोचें, यह नौकरशाही किसकी कोख से पैदा हुई?जवाब है अंग्रेजों की कोख से! किस उद्देश्य से हुई? राज करने के लिए!राज किसलिए?

क्या मोदी ब्यूरोक्रेसी से मुक्त हो पाएंगे?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्यूरोक्रेसी को जरूरत से ज्यादा सिर पर बिठाया है| वह मंत्रियों से ज्यादा ज्वाईंट सेक्रेटरी को महत्व देते हैं। उन की यह कार्यशैली गुजरात का मुख्यमंत्री रहते हुए भी दिखाई दी थी जिसे उन्होंने दिल्ली में भी जारी रखा।

अफसरों को अब समझने लगे मोदी!

बारह अक्टूबर को ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ प्रोग्राम की प्रगति की समीक्षा करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आला अफसरों को आईना दिखाया। अफसर मतलब आईएएस जमात। मोदी ने चेताते हुए कहा कि ‘आपने मेरे पांच साल बरबाद किए हंै, मैं आपको अगले पांच साल बरबाद नहीं करने दूंगा।’

खच्चर, घुड़सवार और भारत!

प्रधानमंत्री मोदी का हिंदुस्तान टाइम्स में आज एक विचारणीय वाक्य मिला। अखबार की खबर के अनुसार 21 अक्टूबर को प्रधानमंत्री ने ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ प्रोग्राम में आला अफसरों को संबोधित करते हुए कहा- ‘आपने मेरे पांच साल बरबाद किए हंै, मैं आपको अगले पांच साल बरबाद नहीं करने दूंगा।

मोदी ने किया नौकरशाही और सरकारी तंत्र की नकारात्मक छवि दूर करने का आहवान

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज देश में नौकरशाही और सरकारी तंत्र की नकारात्मक छवि दूर करने का आहवान