Carrier Pigeon Service

  • कबूतरी संचार की पुरानी व्यवस्था

    ओडिशा पुलिस की यह सेवा अनूठी है। 1946 में, द्वितीय विश्व युद्ध के ठीक बाद, ओडिशा पुलिस ने इसे शुरू किया। सबसे पहले नक्सल प्रभावित कोरापुट जिले में प्रयोग किया गया। धीरे-धीरे यह 38 स्थानों (जिलों, सब-डिवीजनों, सर्कलों और पुलिस स्टेशनों) तक फैल गई। इस सेवा के चरम पर 19 ‘पिजन लॉफ्ट’ सक्रिय थे, जहां 1500 से अधिक प्रशिक्षित कबूतर तैनात थे। आज के डिजिटल युग में जहां व्हाट्सएप, वीडियो कॉल, इंटरनेट और सैटेलाइट फोन से पल भर में संदेश दुनिया के किसी भी कोने में पहुंच जाते हैं, वहां एक प्राचीन संचार माध्यम अभी भी जीवित है – ‘कैरियर...