नागरिकों पर ही है शहर साफ रखने की जिम्मेदारी
सिर्फ सरकार को कोसना काफी नहीं। हमें खुद को भी आईना दिखाना होगा। अवैध निर्माण, मानकों से ज्यादा मंजिलें, नालियों में कचरा फेंकना, ये सब हम खुद करते हैं। ग्रामीण जीवन में जो सामूहिक जिम्मेदारी की भावना थी, शहर आकर हम भूल गए। कहने को शहरी हैं, लेकिन व्यवहार जंगली जैसा। बरसात शुरू होते ही शहरों की गलियों-मोहल्लों में पानी जमा होना शुरू हो जाता है। मौसम विभाग अगर सही अनुमान लगाता है तो मूसलाधार बारिश के अनुमान के बावजूद देश के हर शहर में बरसात के गंदे पानी के तालाबों के बीच नारकीय जिंदगी जीने को मजबूर क्यों हो...