भारत का भविष्य कोचिंग कारोबार में गिरवी
भारत में अब किशोर ऐसे वर्षों से गुजरते हैं जिन्हें जीवन का सबसे जिज्ञासु और सबसे कल्पनाशील समय होना चाहिए। यही वह उम्र होती है जब मनुष्य खेलता है, पढ़ता है, संगीत सुनता है, बहस करता है, असफल होकर फिर उठता है और धीरे-धीरे स्वयं को पहचानता है। लेकिन प्रतियोगी परीक्षा की दुनिया इस पूरे कालखंड को एक ही लक्ष्य में समेट देती है—और वह है रैंक।... केंद्रीकृत परीक्षाएं अब प्रतिभा की निष्पक्ष कसौटी नहीं रह गई है। वह ऐसे जुए में बदलती जा रही है जिसमें प्रश्नपत्र भी खरीद-बिक्री की वस्तु बन चुके हैं। जून 2026 में राजस्थान का...