colonial

  • औपनिवेशिक मानसिकता का सच बड़ा है!

    यूं तो प्रधानमंत्री मोदी ने मैकॉले मानसिकता की सही पहचान की है, लेकिन यह पूरा सच नहीं है। भारत का प्रभावशाली राजनीतिक, बौद्धिक और सामाजिक वर्ग सिर्फ मैकॉले ही नहीं, बल्कि कार्ल मार्क्स की विचारधारा से भी लंबे समय तक ग्रस्त रहा है। स्वतंत्रता के बाद से यह वैचारिक तंत्र— कभी साथ मिलकर, कभी अलग-अलग अपने ‘अधूरे एजेंडे’ को आगे बढ़ाता रहा। हाल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत को ‘मैकॉले मानसिकता’ से पूरी तरह मुक्त कराने का संकल्प दोहराया। उनके अनुसार— "वर्ष 1835 में मैकाले नाम के एक अंग्रेज ने भारत को अपनी जड़ों से उखाड़ने के बीज बोए...