Infographics : COP26 में आज और कल की युवा आवाज

पर्यावरण संरक्षण की नजर से हो रहे सम्मेलन में कई देशों के युवा मुखरता से अपनी बात रख रहे हैं। हम आपको बता रहे हैं कि आज उभर रही इन आवाजों का कल कितना सुनहरा है।

सीओपी26 क्या है और क्या मायने रखता है

सीओपी भिन्न पक्षों के कांफ्रेंस को कहा जाता है – 196 देशों का वार्षिक, वैश्विक शिखर सम्मेलन जो संयुक्त राष्ट्र जलवायु संधि का हिस्सा है और जलवायु की तबाही को टालने की कोशिश कर रहा।

ग्लासगो का लक्ष्य हासिल करने की चुनौती

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस सम्मेलन में कई बड़े लक्ष्य घोषित किए, इस तथ्य के बावजूद कि कार्बन उत्सर्जन के मामले में अमेरिका और चीन जैसे देशों के मुकाबले भारत बहुत पीछे है।

भारत प्रदूषणमुक्त कैसे हो?

दुनिया की सबसे प्रदूषित राजधानी दिल्ली को माना जाता है। इस दिवाली के दौरान दिल्ली ने इस कथन पर अपनी मोहर लगा दी है। दिल्ली के प्रदूषण ने भारत के सभी शहरों को मात कर दिया है।

चीन और रूस पर बाइडेन का निशाना

अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने ग्लासगो में चल रहे संयुक्त राष्ट्र के जलवायु सम्मेलन कॉप-26 में हिस्सा नहीं लेने पर चीन व रूस के नेताओं की कड़ी आलोचना की है।

बेनेट, बिल गेट्स से मिले मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्कॉटलैंड के ग्लासगो में जलवायु सम्मेलन के इतर मंगलवार को कई विश्व नेताओं से मिले। मंगलवार को उन्होंने माइक्रोसॉफ्ट के संस्थापक बिल गेट्स से मुलाकात की।

बाइडेन अभी से ‘लेम-डक’?

बाइडेन अभी यूरोप यात्रा पर हैं। इस दौरान जी-20 शिखर सम्मेलन के बाद स्कॉटलैंड के ग्लासगो में शुरू हो रहे संयुक्त राष्ट्र जलवायु सम्मेलन में जाएंगे।

मोदी ने पेश किया भारत का विजन

पिछड़े देशों को वैश्विक मदद की जरूरत है। ग्लोबल वॉर्मिंग के मुद्दे पर सभी देश एक साथ आएं।

जलवायु सम्मेलन में शामिल होंगे मोदी

जी-20 देशों के सम्मेलन के बाद अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्कॉटलैंड के ग्लासगो में होने वाले जलवायु शिखर सम्मेलन में शामिल होंगे।

कार्बन उत्सर्जन शून्य करने पर सहमति

जी-20 देशों के ने जलवायु पर होने वाले शिखर सम्मेलन से पहले बड़ा समझौता किया है। जलवायु सम्मेलन से पहले इटली में जुटे जी-20 देशों के नेता कार्बन उत्सर्जन शून्य करने पर सहमत हुए हैं।

भारत को दबने की जरुरत नहीं

इस बार ग्लासगो में होनेवाले जलवायु-परिवर्तन सम्मेलन शायद क्योतो और पेरिस सम्मेलनों से ज्यादा सार्थक होगा।

कोई फ़ौरी समाधान नहीं

2021 की इस संस्था की सूची में भारत उन पहले 10 देशों में है, जिनके लिए जलवायु परिवर्तन से सबसे ज्यादा खतरा पैदा हो रहा है।

वर्तमान की बलि भविष्य!

दुनिया के उन देशों ने भी जलवायु की दीर्घकालिक चिंता छोड़ दी है, जिन्हें जलवायु परिवर्तन के मसले पर संवेदनशील समझा जाता था। यूरोप को इस मामले में दुनिया में अग्रणी समझा जाता था।

एक और गंभीर चेतावनी

जलवायु परिवर्तन का असर इतनी तेजी और व्यापक रूप से दिख रहा है कि अब इस परिघटना से इनकार करना किसी के लिए मुश्किल होगा।

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