COP30 summit

  • रस्म-अदायगी की हद!

    ‘कॉप-30 इतिहास में सबसे घातक टॉक शो के रूप में याद रखा जाएगा, जहां कई दिन इस चर्चा में गुजार दिए गए कि चर्चा क्या करनी है। सरकारों की कोशिश थी कि किसी प्रकार की वचनबद्धता से बचा जाए।’ जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र का संबंधित पक्षों का सम्मेलन (कॉप) निरर्थकता की ऐसी हद पर पहुंच गया है, जहां जागरूक जनमत में इससे वितृष्णा पैदा होने लगी है। जिस लक्ष्य के प्रति विभिन्न देशों की सरकारें अपमान का भाव रखती दिख रही हों, उससे जुड़े पहलुओं पर उनकी बातें सुनना आज की एक बड़ी विडंबना है। ब्राजील के बेलेम में...

  • जीवित रहने की बहस में सकंल्प कब?

    क्या जलवायु चिंता से शुरू कोप (COP) सम्मेलन कुछ मायने रखता हैं? या सिर्फ बस एक नौटंकी है? यह प्रश्न अब स्थाई है पर बेचैन करने वाला, आवश्यक भी, मगर अनुत्तरित। क्या COP सम्मेलन से तनिक भी कुछ बदलता हैं? फिलहाल ब्राज़ील के बेले (Belém) में COP30 की तैयारी हो रही है। सो “पार्टियों का सम्मेलन”,  एक और संस्करण, वायदों का एक और जमावड़ा और शोक में डूबी धरती के बीच नए फोटो-ऑप्स। कभी COP एक उद्देश्य के साथ शुरू हुआ था,  एक आदर्श प्रयोग के रूप में। यह वह दुर्लभ मंच था जहाँ अमीर और ग़रीब, लोकतांत्रिक और अधिनायकवादी, ...