निजी कंपनियां जोखिम से भरा फैसला
डीआरडीओ ने पारंपरिक मिसाइल क्षेत्र में जो तकनीकें विकसित की हैं, भारत सरकार ने उन सबको निजी कंपनियों को सौंपने को मंजूरी दे दी है। सवाल है, अपने अनुसंधान क्यों नहीं कर सकतीं? भारत में 2001 में रक्षा क्षेत्र को प्राइवेट सेक्टर के लिए खोला गया था। 2020 में इस क्षेत्र में ऑटोमैटिक रूट से 74 प्रतिशत और सरकारी मंजूरी के रास्ते 100 प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की इजाजत दी गई। अब तक 350 से ज्यादा निजी कंपनियों को उत्पादन लाइसेंस जारी किए गए हैं। लेकिन 2025 में ऑपरेशन सिंदूर के समय भारतीय सेना को निजी क्षेत्र से इतनी निराशा...