मानव-मन की अदृश्य दरारें दर्शाता ‘धुरंधर’
फ़िल्म का सबसे बड़ा जोखिम उसका 214 मिनट का रनटाइम है। यह धैर्य मांगती है, और सामान्य दर्शक के लिए यह चुनौती है। कुछ सबप्लॉट्स, विशेषकर दूसरे हिस्से में, कहानी को भारपूर्ण बनाते हैं। कुछ दर्शकों को यह फिल्म अपने राजनीतिक स्वर में अत्यधिक स्पष्ट और कभी-कभी जिद्दी भी प्रतीत हो सकती है। आज के सिने-सोहबत में एक ऐसी फ़िल्म पर बात करते हैं, जिसके इर्द-गिर्द देश भर में चर्चा छिड़ गई है। फ़िल्म का नाम है 'धुरंधर'। इसके निर्देशक आदित्य धर हैं, जिन्होंने अपनी पहली ही फ़िल्म 'उरी' से ये सिद्ध कर दिया था कि हिंदी सिनेमा उद्योग में...