नेपाल के खेल में भारत कहां है?

नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली एक बार फिर प्रधानमंत्री बन गए हैं। संसद में बहुमत साबित नहीं कर पाने की वजह से पिछले हफ्ते उनको इस्तीफा देना पड़ा था। उसके बाद राज्यपाल विद्या भंडारी ने विपक्षी पार्टियों को सरकार बनाने का मौका दिया। नेपाली कांग्रेस पार्टी ने इसके लिए पहल भी की। उसे उम्मीद थी कि ओली और प्रचंड की वजह से कई खेमे में बंटी कम्युनिस्ट पार्टी की सरकार को समर्थन देने वाली कुछ पार्टियां अलग हो जाएंगी। कम्युनिस्ट पार्टी की कम से कम एक सहयोगी पार्टी के साथ आने की उम्मीद नेपाली कांग्रेस के नेता कर रहे थे। पर ऐसा नहीं हुआ और राष्ट्रपति ने अपनी दी समय सीमा समाप्त होने के बाद ओली को फिर से प्रधानमंत्री बहाल कर दिया। अब उनको अगले 30 दिन में बहुमत साबित करना है। सवाल है कि नेपाल में चल रहा या यह सियासी खेल किसके इशारे पर हो रहा है? और उससे भी बड़ा सवाल है कि इस खेल में भारत कहा है? भारत के विदेश मंत्री लंदन जाकर क्वरैंटाइन हो गए हैं और ऐसा लग रहा है कि उनको कुछ आइडिया भी नहीं है कि नेपाल में क्या चल रहा है। जहां तक भारत सरकार का सवाल है… Continue reading नेपाल के खेल में भारत कहां है?

पाकिस्तान से गुपचुप वार्ता से क्या हासिल?

भारत सरकार बिल्कुल नए अंदाज में कूटनीति कर रही है। एक तरफ पाकिस्तान से सारे संबंध तोड़े हुए हैं। वार्ता बंद है। क्रिकेट और दूसरे खेलों में खिलाड़ियों का आना-जाना बंद है। यहां तक कि एक-दूसरे के यहां दोनों देशों को उच्चायुक्त नहीं हैं। फिर भी परदे के पीछे गुपचुप वार्ता चल रही है। अगर दोनों देशों ने सार्वजनिक बयान देकर और अपने सैद्धांतिक व ऐतिहासिक मुद्दों और विवादों के आधार पर एक दूसरे संबंध तोड़ा तो उसे परदे के पीछे की वार्ता से बहाल करने का क्या मतलब है। अगर संबंध खत्म करना सार्वजनिक था तो संबंध बहाली का प्रयास भी सार्वजनिक रूप से होना चाहिए, जैसे दुनिया के दूसरे देशों के साथ हो रहा है। लेकिन इसकी बजाय भारत सरकार पाकिस्तान के साथ गुपचुप वार्ता कर रही है और तीसरे पक्ष को मध्यस्थ भी बना दिया है। हैरानी की बात है कि पाकिस्तान इसका खुलासा कर रहा है। डंके की चोट पर पाकिस्तान के सरकार से जुड़े बड़े लोग बता रहे हैं कि संयुक्त अरब अमीरात यानी यूएई दोनों देशों के बीच मध्यस्थता कर रहा है। अब पाकिस्तान के सेना प्रमुख ने बताया है कि दोनों देशों के बीच गुपचुप वार्ता हुई है। भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार… Continue reading पाकिस्तान से गुपचुप वार्ता से क्या हासिल?

कूटनीति अब घरेलू राजनीति के लिए!

देश के राजनीतिक दलों के बीच तमाम मतभेदों के बावजूद विदेश और रक्षा नीति पर एक राय होने की परंपरा रही है। नेहरू के जमाने से विदेश और रक्षा नीति के मामले में सरकार देश हित को ऊपर रखते हुए फैसले लेती थी और विपक्षी पार्टियों का समर्थन भी उसे मिलता था। सरकारें कूटनीति के साथ घरेलू राजनीति को नहीं मिलाती थीं और न कारोबार का उसमें दखल होता था। अब वह परंपरा खत्म है। सरकार ने विदेश नीति को घरेलू राजनीति के लिए बना दिया है और कारोबारियों के हितदेश हित के ऊपर है। इस गिरावट के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पहले उनके विदेश सचिव रहे और अब विदेश मंत्री के तौर पर काम कर रहे एस जयशंकर भी जिम्मेदार हैं। वैसे इसकी शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पहले विदेश दौरे से ही तब हो गई थी, जब उन्होंने विदेश जाकर कहा था कि पिछले 60 साल में भारत में कुछ नहीं हुआ है। उन्होंने अलग अलग देशों में जाकर भारतवंशियों को संबोधित किया और हर जगह कहा कि पिछली सरकारों ने भारत का नाम खराब किया है और अब उनकी सरकार भारत का नाम ऊंचा करेगी, जिससे विदेश में बसे भारतवंशियों को ज्यादा सम्मान मिलेगा। इसके बाद… Continue reading कूटनीति अब घरेलू राजनीति के लिए!

56 इंची छाती और पिचकी कूटनीति

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 56 इंची छाती वाले हैं और वे इसी अकड़ के साथ घरेलू राजनीति करते हैं। घरेलू राजनीति में उन्होंने केंद्रीय एजेंसियों के सहारे सभी राजनीतिक दलों के नेताओं, गैर सरकारी संगठनों, मीडिया समूहों आदि को उनकी हैसियत दिखा कर रखी है। लेकिन जब अंतरराष्ट्रीय राजनीति की बात आती है तो 56 इंची छाती वाले प्रधानमंत्री भी सॉफ्ट डिप्लोमेसी ही करते हैं। अंतरराष्ट्रीय राजनीति में कहीं उन्होंने कड़ी राजनीति की हो इसकी मिसाल नहीं है। दक्षिण एशिया में ही इतनी उथल-पुथल मची है लेकिन उसमें कहीं भी प्रधानमंत्री मोदी ने एक्टिव भूमिका नहीं निभाई है। इसकी बजाय वे भारत की निजी कंपनियों में बनी कोरोना वायरस की वैक्सीन दान करके विश्व नेता बन रहे हैं। इस तरह की सॉफ्ट और कल्चरल कूटनीति तो भारत पहले भी करता रहा है पर उससे विश्व नेता नहीं बना जाता है। सोचें, प्रधानमंत्री मोदी अपने से पहले वाले जिन नेताओं को कमजोर और गया-गुजरा बताते हैं उनमें से कई नेताओं ने दक्षिण एशिया के देशों के आंतरिक मामलों में सैन्य दखल दिया था। इंदिरा गांधी ने पाकिस्तान के घरेलू मामले में सैन्य हस्तक्षेप करके बांग्लादेश का गठन कराया था। गलत या सही राजीव गांधी ने भी श्रीलंका में एलटीटीई को खत्म करने… Continue reading 56 इंची छाती और पिचकी कूटनीति

कूटनीति नहीं है सैन्य ताकत का विकल्प

यह बात चीन के संबंध में भी सही है और नेपाल जैसे छोटे से छोटे देश से लेकर पाकिस्तान जैसे जन्म जन्मांतर के दुश्मन देश के बारे में भी सही है कि कूटनीति कभी भी सैन्य ताकत का विकल्प नहीं हो सकती है।

नेपाल में विवादित नक्शे को मंजूरी

भारत के तीन क्षेत्रों को अपना हिस्सा बताते हुए बनाए गए नए नक्शे को नेपाल की संसद से मंजूरी मिल गई है। अब सिर्फ राष्ट्रपति का दस्तखत होना बाकी है, उसके बाद यह नक्शा मंजूर हो जाएगा।

इसे हलके से ना लें

भारत-नेपाल सीमा पर शुक्रवार को जो घटना हुई, उसे दोनों देशों की सरकारों ने स्थानीय घटना कहकर ज्यादा तव्वजो नहीं दी। अगर आम दिन होते, तो इसे ऐसा ही माना जाता।

नेपाल के नक्शे में भारत के इलाके

नेपाल की संसद ने भारत के कुछ इलाकों को अपना बताने के लिए नक्शे में बदलाव से जुड़ा बिल शनिवार को पास कर दिया।

नेपाल की अनावश्यक आक्रामकता

लद्दाख के सीमांत पर भारत और चीन की फौजें अब मुठभेड़ की मुद्रा में नहीं हैं। पिछले दिनों 5-6 मई को दोनों देशों की फौजी टुकड़ियों में जो छोटी-मोटी झड़पें हुई थीं, उन्होंने चीनी और भारतीय मीडिया के कान खड़े कर दिए थे।

आखिर वार्ता से गुरेज क्यों?

यह रहस्यमय है कि नेपाल के साथ सीमा विवाद पर बातचीत करने में भारत ने दिलचस्पी क्यों नहीं दिखाई? गौरतलब है कि ये विवाद खड़ा होते ही नेपाल ने बातचीत की अपील की।

भारत-चीन-नेपालः तिकोनी कूटनीति

इधर छलांग लगाते हुए कोरोना से भारत निपट ही रहा है कि उधर चीन और नेपाल की सीमाओं पर सिरदर्द खड़ा हो गया है लेकिन संतोष का विषय है कि इन दोनों पड़ौसी देशों के साथ इस सीमा-विवाद ने तूल नहीं पकड़ा।

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