Diwali Puja

  • भूदेवी, लक्ष्मी और लोकदेवी

    दीपावली के अवसर पर पूजी जाने वाली लक्ष्मी भी मूलतः वेदकालीन देवी हैं, पर समय ने उनके स्वरूप को इतना बदल दिया कि उनका वैदिक रूप लगभग भुला दिया गया।....जब दीपावली की रात्रि में हम लक्ष्मी-पूजन करते हैं, तो वस्तुतः हम पृथ्वी को प्रणाम कर रहे होते हैं। मिट्टी के कुल्हड़ों में खील-लाई रखकर, दीप जलाकर हम उस भूमि का आभार मानते हैं जिसने हमें जन्म दिया और जो हर बार हमें अन्न देती है। यही हमारी आस्था का वैदिक और वैज्ञानिक संगम है — जहाँ धरती देवी है, लक्ष्मी उसका रूप, और प्रकाश उसकी कृपा। यही सनातन परंपरा है...

  • दीपावली है सत्य, शुद्धि, प्रकाश का पर्व

    स्कन्द पुराण कहता है कि दीपक सूर्य का अंश है; इसलिए हर दीप जलाना सूर्य की ज्योति को अपने जीवन में उतारने का संकल्प है। यही “आत्मदीपो भव” — स्वयं को प्रकाशमान बनाने की साधना है। भारतीय जीवन में अग्नि और प्रकाश को सदा दिव्यता का प्रतीक माना गया है। दीपावली उसी वैदिक भावना की अभिव्यक्ति है। यह पर्व जितना धार्मिक है, उतना ही सामाजिक और आर्थिक भी। दीपावली भारत की उन पर्व परंपराओं में है जो वैदिक संस्कृति के सर्वोच्च आदर्शों — सत्य, प्रकाश और प्रेम — को जनमानस तक पहुँचाती हैं। यह केवल दीपों का उत्सव नहीं, बल्कि...