Do Deewane Shaher Mein

  • रोशनी की तलाश में भटकते ‘दो दीवाने शहर में’

    आज के 'सिने-सोहबत' में जो फ़िल्म चर्चा का विषय है वो है ‘दो दीवाने शहर में’ जिसके निर्देशक हैं रवि उद्यावर और लिखा है अभिरुचि चांद ने। मौजूदा दौर में जब हिंदी सिनेमा का बड़ा हिस्सा हिंसा, प्रतिशोध और अंधेरे मनोविज्ञान से भरा हुआ है, दर्शक स्वाभाविक रूप से एक हल्की-फुल्की, संवेदनशील और मुस्कुराहट से भरी प्रेमकथा की तलाश में रहते हैं। थके हुए मन को दो घड़ी की राहत चाहिए। ऐसे में ‘दो दीवाने शहर में’ से उम्मीद थी कि यह शहरी जीवन की जटिलताओं के बीच प्रेम की कोमल रोशनी तलाशेगी। परंतु दुखद यह है कि फिल्म उस...