बग़ावत की एक गेंद: ‘दूसरा’
तारा की कहानी भारतीय समाज के दोहरे पैमाने पर चोट करती है। पुरुष की बग़ावत को आत्मविश्वास और स्त्री की स्वतंत्रता को परिवार की इज़्ज़त के लिए ख़तरा समझने वाली मानसिकता आज भी मौजूद है। इस लिहाज़ से ‘दूसरा’ एक ज़रूरी विषय उठाती है।… समाज की असली परीक्षा इस बात से नहीं होती कि वह मैदान में बग़ावत करने वाले नायक को कितनी तालियां देता है, बल्कि इस बात से होती है कि अपने ही घर में उठती बग़ावत को कितनी जगह देता है। सिने-सोहबत 13 जुलाई 2002। लॉर्ड्स की बालकनी में सौरव गांगुली अपनी शर्ट लहरा रहे थे। भारत...