Economic inequality

  • भारत का यही सच

    पेरिस स्थित इनइक्वलिटी लैब की यह टिप्पणी महत्त्वपूर्ण है कि ‘भारत दुनिया के उन देशों में है, जहां गैर-बराबरी उच्चतम स्तर पर है और जिसे कम करने की दिशा में हाल के वर्षों में कोई प्रगति नहीं हुई। वैसे तो यह पूरी दुनिया का हाल है कि आर्थिक गैर-बराबरी ‘ऐतिहासिक रूप से उच्चतम स्तर’ पर पहुंच गई है और इसमें ‘लगातार इजाफा’ हो रहा है, लेकिन पेरिस स्थित इनइक्वालिटी लैब की ताजा रिपोर्ट का भारत के संदर्भ में एक अलग महत्त्व भी है। हाल में सरकारी एजेंसियों ने आंकड़ों के खेल से नैरेटिव बनाने की कोशिश की है कि नरेंद्र मोदी...

  • विषमता पर दो दृष्टियां

    economic inequality: पिकेटी का सुझाव है कि भारत को जीडीपी-टैक्स अनुपात में सुधार कर अतिरिक्त संसाधन इकट्ठा करना चाहिए। उसका निवेश मुफ्त स्कूली शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाओं और इन्फ्रास्ट्रक्चर को सशक्त करने में किया जाना चाहिए। यही विकसित देश बनने का रास्ता है। also read: IND vs AUS: गाबा में फ्लॉप शो! विराट, यशस्वी और गिल की नाकामी से टीम इंडिया की लुटिया डूबी बढ़ती आर्थिक गैर-बराबरी पर राजधानी में एक गंभीर चर्चा हुई। इसमें दो नजरिए उभर कर सामने आए। एक नजरिये की नुमानंदगी भारत सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन ने की। उन्होंने कहा कि न्यायपूर्ण आर्थिक विकास...

  • ऐसी असमानता और ऐसा शोषण

    Economic inequality, भारत की अर्थव्यवस्था पहले भी पिरामिड की शक्ल में थी, जिसमें शीर्ष पर कुछ लोगों के पास सारी संपत्ति संचित थी, जबकि नीचे के लोग मामूली जरुरतों के मोहताज थे। अब पिरामिड का निचला हिस्सा बड़ा होता जा रहा है। इससे यह प्रमाणित है कि कोई भी आर्थिक अवधारणा हो भारत में उसका सबसे खराब रूप देखने को मिलेगा। नेहरू ने जब समाजवाद का सिद्धांत अपनाया या मिश्रित अर्थव्यवस्था का सिद्धांत अपनाया तब भी उसका सबसे खराब रूप देखने को मिला और 1991 के बाद अर्थव्यवस्था खुली, उदार नीतियां अपनाई गईं, जिसे लोकप्रिय शब्दों में कह सकते हैं...