धरातल की असमानता
इलेक्ट्रॉल ट्रस्ट्स में मौटे तौर पर पूंजीपति ही योगदान करते हैं। इलेक्ट्रॉल बॉन्ड्स के जरिए वे ही चंदा दे रह थे। मगर यह नहीं लगता कि इलेक्ट्रॉल बॉन्ड्स के रद्द होने से राजनीतिक चंदे के स्वरूप पर कोई फर्क पड़ा है। विभिन्न इलेक्ट्रॉल ट्रस्ट्स ने 2024-25 में विभिन्न पार्टियों को दिए गए चंदे की जो रिपोर्ट निर्वाचन आयोग को सौंपी है, उससे फिर जाहिर हुआ है कि देश में राजनीतिक प्रतिस्पर्धा का धरातल कितना असमान हो चुका है। यह भी साफ हुआ है कि पूंजीपति वर्ग ने किस हद तक भाजपा के पक्ष में अपना दांव लगा रखा है। नौ...