संतुलित और सही
इच्छा-मृत्यु की प्रक्रिया को संपन्न कराने के लिए अस्पताल अब अधिकृत हो जाएंगे। मगर प्रक्रिया की शुरुआत तभी होगी, जब मरीज के “सर्वोत्तम हित में” विस्तृत मेडिकल समीक्षा कर ली गई होगी। इस तरह इच्छा-मृत्यु का एक कायदा तय हो गया है। अचेतावस्था में पड़े व्यक्ति की चेतना वापस आने की आस टूट गई हो, तो मेडिकल उपकरणों से सहारे उस व्यक्ति की सांस चलाते रखने का प्रयास कब तक किया जाना चाहिए? डॉक्टर हथियार डाल चुके हों, उसके बावजूद मानसिक रूप मृत, लेकिन शारीरिक रूप से जीवित ऐसे व्यक्ति की उपस्थिति किस हद तक वांछित है? ये बड़े बुनियादी...