एसआईआई वैक्सीन का निर्यात मार्च-अप्रैल तक रोका गया

सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया द्वारा ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका वैक्सीन का निर्यात फिलहाल मार्च या अप्रैल तक अवरुद्ध है, क्योंकि आगामी महीनों में भारत (चीन के साथ) इस क्षेत्र में वितरण के प्रयासों का नेतृत्व करने के लिए तैयार है।

उप्र को देश के निर्यात का हब बनाएगी योगी सरकार

अपनी विविधता के नाते उत्तर प्रदेश देश के निर्यात का हब बने इसके लिए सरकार हर जिले का एक्सपोर्ट एक्शन प्लान तैयार करेगी।

प्याज के निर्यात पर लगी रोक, कीमतों में नरमी की उम्मीद

प्याज के दाम में हो रही वृद्धि को देखते हुए केंद्र सरकार ने प्याज की सभी वेरायटी के निर्यात पर रोक लगा दी है। प्याज के निर्यात पर रोक लगने से आगे कीमतों में नरमी की उम्मीद की जा सकती है।

भारत ने पाबंदी को सख्त किया

नई दिल्ली। कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों के इलाज में इस्तेमाल हो रही मलेरिया के इलाज वाली दवा के निर्यात पर लगाई गई पाबंदी को भारत सरकार ने और सख्त कर दिया है। सरकार ने मलेरिया के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवा हाइड्रोक्सिक्लोरोक्वीन के निर्यात पर पाबंदी को सख्त करते हुए विशेष आर्थिक क्षेत्रों, सेज की इकाइयों को भी रोक के दायरे में शामिल कर दिया है। सरकार देश में कोरोना वायरस के संक्रमण के कारण हालात बिगड़ने की आशंकाओं को देखते हुए ये रोक लगा रही है, ताकि देश में जरूरी दवाओं की कमी नहीं हो। विदेशी व्यापार महानिदेशालय ने एक अधिसूचना में कहा- हाइड्रोक्सिक्लोरोक्वीन और इससे बनने वाली दूसरी दवाओं का निर्यात अब सेज से भी नहीं हो सकेगा, भले ही इसके लिए पहले मंजूरी दी जा चुकी हो या भुगतान किया जा चुका हो। निर्यात पर बिना किसी छूट के पाबंदी रहेगी। गौरतलब है कि सीमा शुल्क नियमों के मामले में सेज को विदेशी निकाय माना जाता है। इस कारण निर्यात पर रोक के आदेश आम तौर पर सेज पर लागू नहीं होते हैं। सरकार ने घरेलू बाजार में उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिये हाइड्रोक्सिक्लोरोक्वीन के निर्यात पर 25 मार्च को रोक लगाने की घोषणा की… Continue reading भारत ने पाबंदी को सख्त किया

जांच किट का निर्यात पूरी तरह से प्रतिबंधित

सरकार ने कोरोना महामारी के मद्देनजर प्रयोगशालाओं में इस्तेमाल होने वाली जांच किट तथा निदान में इस्तेमाल होने वाले संबंधित उपकरण का निर्यात पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिया है।

विदेशों से फालतू चीजें क्यों मंगाएं?

आज यह खबर पढ़कर मुझे बहुत खुशी हुई कि भारत सरकार कई तरह के विदेशी माल मंगाना बंद करनेवाली है। अकेले चीन से आनेवाली 371 चीज़ों पर रोक लगानेवाली है। इन चीज़ों में बच्चों के खिलौने, दवाइयां, बिजली का सामान, तार, टेलीफोन, फर्नीचर, कुछ खाने-पीने की चीजें आदि हैं। इन चीजों में से एक भी चीज़ ऐसी नहीं है, जिसके भारत में नहीं आने से भारतीयों का कोई बहुत बड़ा नुकसान हो जाएगा या उन्हें जान-माल की हानि हो जाएगी। ये सब चीजें ‘अनावश्यक’ चीजों की श्रेणी में आती हैं। आप जानते हैं कि ये गैर-जरुरी चीजें कितने की आती हैं? कम से कम 4 लाख करोड़ रु. की याने अरबों-खरबों रु. की। ऐसी चीजें हम अमेरिका और अन्य देशों से भी मंगाते हैं। हमारे देश की पसीने की कमाई के खरबों रु. विदेशों में बह जाते हैं। यदि इनका आयात बंद हो जाए तो यह बचा हुआ रुपया देश के खेतों और कारखानों की बेहतरी में लगाया जा सकता है। मैं तो कहता हूं कि सभी देशों से आनेवाले अय्याशी के सामानों पर रोक क्यों नहीं लगाई जाती? मुट्ठीभर लोग, जो अरबों रु. इन चीजों पर बहाते हैं, वे कौन हैं? वे लोग भारतीय नहीं हैं, वे इंडियन हैं।… Continue reading विदेशों से फालतू चीजें क्यों मंगाएं?

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