किसान आंदोलन का साल पूरा!

केंद्र सरकार के बनाए तीन कृषि कानूनों के विरोध में चल रहे किसान आंदोलन का एक साल पूरा हो गया है। किसानों ने 26 नवंबर 2020 को दिल्ली की सीमा पर पहुंच कर आंदोलन शुरू किया था।

पंजाब में किसान आंदोलन के नाम पर स्मारक बनेगा – सीएम चरणजीत सिंह चन्नी

आजादी के बाद अगर कोई बड़ा संघर्ष था तो यह (तीन कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों का आंदोलन) था जिसने लोकतांत्रिक को मजबूत किया

किसानों के मसले पर शाह से मिले खट्टर

हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की है। बताया जा रहा है कि उन्होंने किसानों के आंदोलन के बारे में उनसे बातचीत की है।

विरोध के अधिकार के बिना अधूरा लोकतंत्र

केंद्र सरकार के बनाए तीन कृषि कानूनों के विरोध में 10 महीने से अधिक समय से चल रहा आंदोलन अब इस मुकाम पर है कि उसके बहाने विरोध करने के लोकतांत्रिक अधिकार की परीक्षा होगी।

आंदोलन को कुचलना है

उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में जो घटना हुई, उससे देश के वे लोग खुद को कुचला गया महसूस कर रहे हैं, जिनका विवेक और संवेदनशीलता अभी जिंदा है।

तो पीड़ित क्या करें?

किसान आंदोलन के सिलसिले में सुप्रीम कोर्ट ने जो सवाल पूछे, वे अतार्किक नहीं हैं। लेकिन यह जरूर कहा जा सकता है कि वे संदर्भ से कटे हुए हैँ।

किसान आंदोलन का प्रायोजित विरोध

भारत में पिछले कुछ समय से आंदोलन की परंपरा खत्म होती जा रही है। केंद्र या राज्य सरकार की नीतियों के विरोध में अगर कहीं आंदोलन हो रहा है तो वह ज्यादातर प्रतीकात्मक होता है।

किसान आंदोलन का दम

जिन बड़े आंदोलनों का खूब जिक्र होता है, वे अक्सर मध्य वर्ग केंद्रित थे या फिर उनमें गोलबंदी अस्मिता के मुद्दों पर हुई थी। जबकि मौजूदा किसान आंदोलन में सीधे तौर पर रोजी-रोटी के सवाल प्रमुख हैं।

सोनिया की वर्चुअल मीटिंग, नतीजा क्या?

तभी उस मीटिंग में तय हुए किसी कार्यक्रम पर अमल नहीं हुआ है। उस वर्चुअल बैठक में तय हुआ था कि 20 से 30 सितंबर के बीच देश भर में सारी विपक्षी पार्टियां मिल कर साझा आंदोलन करेंगी।

कृषि कानून पर सरकार व कोर्ट रिपोर्ट

केंद्रीय कृषि कानूनों और उसके विरोध में चल रहे किसानों के आंदोलन पर विचार करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने तीन सदस्यों की जो कमेटी बनाई थी, उसकी रिपोर्ट जारी करने का समय आ गया है।

मोदी सरकार का दुश्मन साबित होगा गोदी मीडिया !

आज की तारीख में मोदी सरकार का सबसे बड़ा दुश्मन कौन है? वही जिस पर सरकार सबसे ज्यादा भरोसा करती है। जी हां, गोदी मीडिया।

राहुल का बदला राजीव गांधी से

राहुल ट्रैक्टर चलाकर, साइकल पर संसद आ गए। संसद से पैदल मार्च करते हुए किसान संसद में जंतर मंतर पहुंच गए। मीडिया ने नहीं दिखाया, अखबारों ने छोटा से अंदर छापा। मगर बात रुक नहीं पाई। सरकार चौंक गई। बेटे का बदला बाप से निकाला गया।

राहुल के खिलाफ कैसे कैसे तर्क

राहुल गांधी देश की सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी के नेता हैं तो उनका काम है सरकार का विरोध करना सो, वे विरोध करते हैं। लेकिन ऐसा लग रहा है कि वे जितना सरकार का विरोध करते हैं उससे ज्यादा सरकार के मंत्री और सत्तारूढ़ पार्टी के नेता उनका विरोध करते हैं।

टिकैट ने अब दी योगी आदित्यनाथ को चुनौती, कहा- लखनऊ के रास्तों को बंद कर उसे दिल्ली बना देंगे…

इसी क्रम में अब किसान नेता राकेश टिकैत ने योगी आदित्यनाथ को खुली चुनौती दे दी है. टिकैत ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा है कि यदि अब भी सरकार नहीं मानी तो वे लखनऊ को दिल्ली बना देंगे.

संसद पहुंचने के पहले राहुल गांधी ने किया सबको हैरान, कहा- किसानों को अनदेखा कर रही है सरकार

राहुल गांधी ने संसद भवन तक ट्रैक्टर चलाते हुए किसानों को अपना समर्थन दिया. कांग्रेस के प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला , दीपेंद्र हुड्डा समेत अन्य मौजूद रहे. राहुल गांधी द्वारा चलाए जा रहे ट्रैक्टर के सबसे आगे एक पोस्टर लगाया गया था जिस पर कृषि कानूनों के खिलाफ नारे लिखे हुए थे.

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