Film Review Verity

  • ‘वेरिटी’: सच से ज़्यादा ख़तरनाक अफ़साना

    कुछ कहानियां हमें डराती नहीं हैं। वे हमारे भीतर एक शक छोड़ जाती हैं। ऐसा शक, जो सिनेमा हॉल से बाहर निकलने के बाद भी हमारे साथ चलता है। क्या जो हमने देखा, वही सच था? क्या जिस आदमी पर हमें भरोसा हुआ, वह भरोसे के लायक था? क्या जिस औरत को हम पीड़ित समझ रहे थे, वह वास्तव में पीड़ित थी? सिने-सोहबत सबसे बड़ा सवाल कि अगर किसी लेखक ने अपनी ज़िंदगी के सबसे अंधेरे हिस्से को कहानी की शक्ल में लिख दिया हो, तो हम कैसे तय करेंगे कि उसमें कितना सच है और कितना कल्पना? माइकल शोवाल्टर...