सड़कों और फ्लाईओवर का यह कैसा निर्माण?
आईआईटी जैसे संस्थानों के विशेषज्ञों का मानना है कि सबसे कम बोली वाले ठेकेदार को काम मिलने से लागत कम करने के लिए घटिया सामग्री का इस्तेमाल होता है। सब-कॉन्ट्रैक्ट की कई परतें और डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) में लापरवाही भी जिम्मेदार हैं। विशेषज्ञ सुझाव देते हैं कि सफलता को सिर्फ किलोमीटर में नहीं, बल्कि टिकाऊपन में मापा जाए। पिछले कुछ वर्षों में देश भर में सड़कों के धंसने, फ्लाईओवर के गिरने और नयी-नयी बनी सड़कों के जल्दी खराब होने की घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं। बारिश हो या सामान्य मौसम, सड़कें गड्ढों में तब्दील हो जा रही हैं, सेवा...