गंगा-जमनी तहज़ीब से ही भला
मुझे अच्छे से याद है कि शायद ही कोई ऐसा स्वतंत्रता दिवस या गणतंत्रता दिवस हुआ हो जब हमने सुबह सबसे पहले उस्ताद बिस्मिल्ला ख़ान की शहनाई न सुनी हो। लेकिन बीते कुछ वर्षों से जिस तरह एक विशेष धर्म और समाज को लेकर भेद-भाव फैलाया जा रहा है वह हमें सही दिशा में नहीं ले जा रहा। ...निहित स्वार्थों के बहकावे में आए बिना हमें सदियों से चली आ रही गंगा-जमनी तहज़ीब का पालन करना चाहिए, जो हमारे देश की परंपरा रही है। क्योंकि ‘मज़हब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना।’ मशहूर फ़िल्म निर्माता यश चोपड़ा द्वारा बनाई गई...