चेतना संचार और पतितपावनी गंगा
वैशाख शुक्ल सप्तमी, जिसे गंगा सप्तमी या जह्नु सप्तमी कहा जाता है, गंगा के दूसरे जन्म का प्रतीक पर्व है। कथा के अनुसार जब गंगा ने ऋषि जह्नु के यज्ञ स्थल को जलमग्न कर दिया, तो उन्होंने क्रोध में गंगा को पी लिया और बाद में अपने कान से उन्हें पुनः बाहर निकाला। यह प्रसंग प्रकृति और ज्ञान, यानी विज्ञान और परंपरा के बीच संतुलन का प्रतीक है। 23 अप्रैल - गंगा सप्तमी भारतीय चिंतन में गंगा केवल एक नदी नहीं, बल्कि चेतना का सजीव रूप और सनातन संस्कृति को आगे बढ़ाने वाली धारा है। ऋग्वेद के नदी सूक्त से...