Gas Oil Crisis

  • पकौड़ा इकॉनोमी के अब फाफड़ा के दिन!

    ईरान के सरेंडर या नेतन्याहू-ट्रंप के खुमैनी के आगे सरेंडर जैसी अनहोनी हो तो बात अलग है, अन्यथा आने वाले महीनों में प्रधानमंत्री मोदी के बारह साल पुराने “पकौड़ा-चाय-ठेला मॉडल” के बाजे बजने वाले हैं। उन्हे पकौडा म़ॉडल की जगह गुजराती फाफड़े के संगठित उत्पादन का राष्ट्रीय मिशन बनाना होगा।  मतलब फाफड़ा राष्ट्रीय स्नैक घोषित हो। करोड़ों लोंगों की ठेले-रेहड़ी-खोमचे-गुमटियों-दुकानों की जगह भारतीय “उद्यमिता” के प्रतिमान अंबानी-अडानी की फाफड़ा फैक्ट्रीयां बनवाएं। ताकि गैस सिलेंडरों, गंदगी जैसे सकंटों से पिंड छूटे। राष्ट्रीय “उद्यमिता” की पैकेजिंग, ब्रांडिंग के फाफड़ों को भारत खाने लगे। कई फायदे है। ठेलों, गुमटियों की उस भीड़ से...