संकट किसी और दिन के लिए टला भर है
मोदी नेतृत्व वाली भाजपा की चुनाव जीतने (या चुनाव को मैनेज करने) की क्षमता में सेंध लगी है या नहीं, इसका आकलन करने के पर्याप्त साक्ष्य हमारे पास मौजूद नहीं हैं। लेकिन यह जरूर स्पष्ट हो गया है कि मोदी सरकार जन मानस पर वह ऑथरिटी गंवा चुकी है, जिस कारण वह चुनौती-विहीन नजर आती थी। अब उसके पास जो ऑथरिटी बची है, वह सुरक्षा तंत्र एवं पुलिस की दमनकारी क्षमता पर आधारित है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा नेतृत्व ने ज़ेन-जी के बागी मूड के आगे अपमान की घूंट पी लेना ही बेहतर समझा। 20 जुलाई को दिल्ली में...