तुलसी का दर्शन संजीवनी के समान
रामचरितमानस में प्रयुक्त चौपाई, दोहा, सोरठा और हरिगीतिका छन्दों का क्रम केवल काव्यात्मक नहीं, अपितु मनोवैज्ञानिक है। प्रत्येक काण्ड का प्रारम्भ संस्कृत श्लोकों (मंगलाचरण) से होता है, जो ग्रन्थ की शास्त्रीय गम्भीरता को अक्षुण्ण रखता है। विनय पत्रिका के पद राग-रागिनियों, जैसे राग बिलावल, राग केदारा, राग भैरवी में निबद्ध हैं, जो तुलसी के गन्धर्व विद्या के अगाध ज्ञान को प्रमाणित करते हैं। 9 अगस्त -गोस्वामी तुलसीदास जयंती भारतीय वांग्मय के दैदीप्यमान नक्षत्र, जनमानस के शाश्वत मार्गदर्शक और सांस्कृतिक पुनर्जागरण के संवाहक गोस्वामी तुलसीदास की जयंती मात्र एक तिथि का स्मरण नहीं, अपितु लोक चेतना के चरमोत्कर्ष का उत्सव है।...