सेवा में चुप्पी, सेवानिवृत्ति पर सनसनी!
हम सत्य को तब मनाते हैं जब वह किसी को नुकसान न पहुंचाए। अधिकारी को याद रखना चाहिए कि पछतावे की किताब अच्छी बिक सकती है, पर अच्छी संस्थाएं उन लोगों से बनती हैं जो पछतावे के लिए सामग्री जमा ही नहीं करते। नियम पुस्तक हाथ में हो और रीढ़ मज़बूत हो, तो सेवानिवृत्ति पर सनसनी की जरूरत कम पड़ती है। लोकतंत्र को बाद के रहस्य नहीं, समय पर दर्ज हिम्मत चाहिए। भारत में आजकल एक नए साहित्यिक फैशन का चलन आम है। सेवानिवृत्त अधिकारी अक्सर किताब, साक्षात्कार और पॉडकास्ट पर वे बातें कहते हैं जो सेवाकाल में वे फाइल...