गुरु की महिमा और गुरु पूर्णिमा
गुरु पूर्णिमा के दिन ही गुरुकुलों में दीक्षांत समारोह आयोजन किए जाते थे। गुरु पूर्णिमा की मंगल बेला में ही छात्रों को स्नातक उपाधियां प्रदान की जाती थीं। गुरु की सभी शिक्षाओं को आत्मसात कर लेने वाले विद्यार्थी, जिनकी कुशलता व क्षमता पर गुरु को संदेह नहीं रहता था, उन्हें इस दिन उपाधियां प्रदान की जाती थीं। भारतीय सभ्यता- संस्कृति, धर्म- दर्शन, श्रुति- वांग्मय में गुरु को ब्रह्म से भी ऊंचा स्थान व अधिक महत्व प्रदान किया गया है। गुरु को प्रेरक, सत्य ज्ञान प्रदाता, प्रथम आभास देने वाला, सच्ची लौ जगाने वाला और कुशल आखेटक कहा गया है, जो...