दादी और नानी के बनाए स्वाद में बीमारियां नहीं थी
हम तेज़ी से एक बीमार देश बनते जा रहे हैं। हम बीमारी को डाक्टरी इलाज से ठीक करने में लाखों रुपया गवां देते हैं लेकिन बीमारी के कारणों को समझ कर जड़ से खत्म करने की कवायद नहीं करते। जबकि सच्चाई यह है कि अगर हम अपने धर्मशास्त्रों के अनुसार अपने भोजन और दिनचर्या को संचालित करें तो आधुनिक जीवन की चकाचौंध के बीच भी हम पूरी तरह स्वस्थ रह सकते हैं। आप भारत के किसी भी शहर या कस्बे में घूम कर देखिए तो सबसे ज़्यादा दुकानें अंग्रेज़ी दवाओं की मिलेंगी या पैथोलॉजी टेस्ट और एमआरआई आदि करने वाले...