खिसियानी हिन्दू खम्भा नोचे!
हिन्दू नेता अपने ही हिन्दू बंधुओं (विरोधी दल) पर जितना शेर बनते हैं, उतना ही मुस्लिम या विदेशी दबंगों के सामने बाएं-दाएं करने लगते हैं। यह मौलाना मुहम्मद अली ने देखा था, और विन्स्टन चर्चिल ने भी। वही बराक ओबामा और डोनाल्ड ट्रंप ने भी देखा है। अधिकांश हिन्दू नेता मजबूत दुश्मन या सहयोगी से भी सहज नहीं रहते। वे केवल अनुचर चाहते हैं। वही चरित्र आम हिन्दू बौद्धिकों में है। समान विचार वाले से ही सहज रहना। अन्यथा बचना।.. गत पंद्रह-बीस सालों के ही मीडिया रिकॉर्ड से आकलन करें, तो अधिकांश हिन्दू विमर्श -- नेताओं से लेकर प्रोफेसरों, टिप्पणीकारों...