Hindu Politics

  • तभी काबिल लोग देश छोड़ जा रहे हैं।

    गत आठ दशकों में विविध क्षेत्रों में तबाह, परेशान, अपमानित होने वाले करोड़ों हिन्दू केवल इसलिए दुर्गति में पड़े, क्योंकि अंग्रेजों का स्थान लेने के ख्वाहिशमंद हिन्दू नेता राजनीति के मूल तत्व से लापरवाह रहे हैं। वह कि जिम्मेदारी से अपने को दाँव पर लगाकर, दृढ़ता से ही राज्य एवं उस में रहने वाली जनता की रक्षा होती है। किन्हीं आडंबरों, सूक्तियों, दूसरों को दोष, या तीसरों को प्रेरित करने से नहीं। हिन्दू राजनीति का दिवालियापन-2 ऐसी भोली राजनीति का आरंभ प्रथम विश्व-युद्ध में बिना शर्त अंग्रेजों की मदद करने से हुआ। तब तिलक, एनी बेसेंट, जिन्ना, जैसे नेता 'होम-रूल'...

  • हिन्दू राजनीति पतवार विहीन नाव

    हिन्दू और मुस्लिम नेताओं की आदतों, शैलियों, और उपलब्धियों में अंतर को 'भारतीयता' के माथे नहीं डाला जा सकता। वह सीधे-सीधे हिन्दू नेताओं और मुस्लिम नेताओं की भिन्नताएं हैं। हिन्दू नेता आज तक, यानी गत एक सौ बीस सालों से जब से उन्होंने राजनीति में हाथ आजमाना शुरू किया, तब से स्तरीय राजनीति का क-ख-ग भी नहीं सीख पाए हैं। हिन्दू नेता धर्म का आधार छोड़ पाखंड भरोसे रहते हैं। इसलिए उन का समाज पिटता है। वे सत्ता-साधन, और लफ्फाजी से अपनी पिटाई छिपाकर बेशर्मी से जमे रहते हैं। हिन्दू राजनीति का दिवालियापन – 1 भारत में हिन्दू नेताओं का...