जो डिस्मैंटलिंग चाहते वहीं तो ‘हिंदुत्व’ निर्माता!

सनातन धर्म याकि हिंदू समाज दो पाटों में पीस रहा है! एक पाट उन सेकुलर-वामपंथियों का है, जिन्होंने गोधरा कांड के बाद नरेंद्र मोदी को खलनायक करार दे कर उन्हें हिंदुओं में महानायक बनवाया।

Salman, Shahrukh और Aamir ​डरते हैं इसलिए कुछ नहीं कहते, मैं नमाज नहीं पढ़ता जो पढ़ते हैं वो समझते नहीं- नसरुद्दीन शाह

शाह ने कहा की बॉलीवुड के तीनों दिग्गज खान सलमान,शाहरुख और आमिर डर के कारण सरकार के खिलाफ कुछ नहीं कहते. उन्होंने कहा कि मैं इस बारे में ज्यादा नहीं कहना चाहता…

मोदी राज की ‘हिंदुत्व’ स्टोरी!

कोई यदि हिंदुत्व को तालिबानी करार भी दे रहा है तो संघ परिवार को यह धन्यवाद करना चाहिए जो हिंदू शब्द का सात वर्षों में ऐसा ‘हिंदुत्वी’ कायाकल्प हुआ!

डिस्मैंटलिंग हिंदुत्वः हे राम! मोदी उपलब्धि या…

‘डिस्मैंटलिंग हिंदुत्व’ का? इस बात पर ‘नया इंडिया’ में बलबीर पुंज और शंकर शरण के लेख व मीडिया के लब्बोलुआब में समझने वाला पहला सवाल है कि क्या हम हिंदू दुनिया में बदनाम हो गए हैं?

West Bengal : मां मां दुर्गा के साथ ममता बनर्जी की भी मूर्ती, BJP ने कहा- इससे घटिया राजनीति नहीं हो सकती…

कोरोना के प्रकोप को देखते हुए कम पूजा पंडालों के बनाने की अनुमति दी गई है. लेकिन बागुईहाटी क्षेत्र से उन्नयन समिति का दुर्गा पूजा पंडाल बनकर तैयार होने के पहले ही विवादों में आ गया है….

15 लाख के नोटों से हुआ महादेव का श्रृंगार, सोशल मीडिया में वायरल हो रही हैं तस्वीरें …

हिंदू धर्म में सावन का अपना ही महत्व है. इस महीने को सनातन धर्म में विश्वास रखने वाले लोग सबसे पवित्र महीने के रूप में मानते हैं. देश के विभिन्न राज्यों में अलग-अलग तरीके से भगवान शिव की पूजा की जाती

इस्लाम तो अपना लिया था लेकिन शवों को दफनाने के लिए करनी पड़ती थी जद्दोजहद , फिर 18 लोगों ने अपनाया हिंदू धर्म

सने कहा कि बचपन में वह होली और दिवाली मनाया करता था अब एक बार फिर से वह हिंदू धर्म को अपना लेगा. राशिद अब एक बार फिर से विकास कुमार के नाम से जाना जाने लगेगा.

गंगा दशहरा 2021 : जानें कब है गंगा दशहरा, शुभ मुहुर्त और मां गंगा के पृथ्वी पर अवतरित होने की कहानी

hridwar| हिंदु धर्म में हर त्यौंहार का अपना अलग महत्व है। हर त्यौहार को बड़ी ही धूम-धाम से मनाया जाता है। लेकिन गंगा दशहरा का अपने आप में एक विशेष महत्व है। पूरे देश में बड़े ही हर्षोल्लास के साथ यह पर्व मनाया जाता है। इस वर्ष गंगा दशहरा 20 जून को है।हर साल ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथी को गंगा दशहरा मनाया जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार ऋषि भागीरथी की कड़ी तपस्याओं के बाद मां गंगा धरती पर आने के लिए राजी हुई थी। इस दिन मां गंगा धरती पर अवतरित हुई थी। उसी समय से गंगा दशहरा के नाम से यह पर्व ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथी को मनाया जाता है। गंगा के पानी में स्नान करने से सबी पापों की मुक्ति हो जाती है। और गंगा दशहरे पर तो मां गंगा का विशेष प्रसाद मिलता है। मान्यता है कि गंगा दशहरे के दिन गंगा नदी के पवित्र जल में स्नान करने या डुबकी लगाने से मनुष्य के सभी पापों का नाश हो जाता है और सभी मनोंकामनाए भी पूर्ण होती है। इस दिन दान करने की मान्यता है। अपनी श्रद्धानुसार दान करने से पापों से मुक्ति मिलने के साथ-साथ उसे… Continue reading गंगा दशहरा 2021 : जानें कब है गंगा दशहरा, शुभ मुहुर्त और मां गंगा के पृथ्वी पर अवतरित होने की कहानी

इंडोनेशिया में स्थित है भगवान विष्णु की सबसे ऊंची प्रतिमा, जिसे बनाने में लगे 28 साल, मुर्तिकार को प्राप्त है पद्मश्री पुरस्कार ..जानें इसकी खासियत

इंडोनेशिया : हिन्दू धर्म के ग्रंथों के अनुसार विष्णु सृष्टि रचने वाले तीन मुख्य देवों में एक हैं। पुराणों में विष्णु को विश्व या जगत का पालनहार कहा गया है। वो त्रिमूर्ति देवों में शामिल हैं। त्रिमूर्ति के अन्य दो देवता ब्रह्मा और शिव हैं। ब्रह्मा को जहाँ विश्व का सृजन करने वाला माना जाता है, तो शिव को संहारक माना गया है। पूरे भारत में भगवान विष्णु को अलग-अलग नामों से जाना जाता है और अलग-अलग रूपों में पूजा भी की जाती है।समस्त भारत में श्री हरि के अनेकों मंदिर है। जिनकी अलग-अलग मान्यता है। लेकिन आपको जानकर आश्चर्य होगा कि दुनिया में भगवान विष्ण की सबसे ऊंची मूर्ति भारत में नहीं है। ये एक ऐसे देश में है जो मुस्लिमों की आबादी के मामले में दुनिया में नंबर एक पर है वो देश है इंडोनेशिया। इंडोनेशिया में इस विशाल मूर्ती का निर्माण करने वाले मूर्तिकार बप्पा न्यूमन नुआर्ता को भारत में सम्मानित किया गया और राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के हाथों पद्मश्री पुरस्कार प्रदान किया गया था। also read: कोरोना काल में संकट मोचन “हनुमान” भी आए संकट में, आर्थिक तंगी से गुज़र रहे है .. 2018 में तैयार हुई श्री हरि की प्रतिमा विष्णु की यह मूर्ति इंडोनेशिया मे… Continue reading इंडोनेशिया में स्थित है भगवान विष्णु की सबसे ऊंची प्रतिमा, जिसे बनाने में लगे 28 साल, मुर्तिकार को प्राप्त है पद्मश्री पुरस्कार ..जानें इसकी खासियत

सूर्य ग्रहण : शनि जयंती के दिन लगेगा इस साल का पहला सूर्य ग्रहण, जानें सूर्य ग्रहण लगने के कारण और मान्यताएं..

नई दिल्‍ली: साल 2021 का पहला सूर्य ग्रहण (Solar eclipse)  10 जून, गुरुवार को लगने जा रहा है। इसी दिन ज्येष्ठ भावुका अमावस्‍या (Jyeshtha Amavasya) और शनि जयंती (Shani Jayanti) भी है।  साथ ही इस दिन धृति और शूल योग भी बनेगा।  वैसे भी सूर्य ग्रहण (Surya Grahan) को हिंदू धर्म में नकारात्‍मक प्रभाव (Negative effect) डालने वाला बताया गया है। इसका असर सभी राशियों पर पड़ता है। सूर्य ग्रहण करने से हमारे जीवन पर भी गहरा असर होता है। सूर्य ग्रहण एक खगोलीय घटना होती है। इस बार भी यह ग्रहण राशियों (Zodiac Signs) पर शुभ-अशुभ असर डालेगा। आइए, उन राशियों के बारे में जानते हैं जिन पर इस सूर्य ग्रहण का नकारात्‍मक असर पड़ सकता है। ऐसा माना जाता है कि सूर्य ग्रहण को नंगी आंखो से नहीं देखना चाहिए। लोगों द्वारा एक्सरे-प्लेट से सूर्य ग्रहण देखा जाता है। सूर्य ग्रहण के बारे में कुछ मान्याताएं भी जुड़ी होती है। माना जाता है सूर्य ग्रहण नकारात्मक प्रभाव डालता है। हिंदु धर्म में ग्रहण को भक्ति से जोड़ लिया गया है। इसकारण लोगों द्वारा यह ज्यादा माना जाता है। इसे भी पढ़ें Petrol Diesel की कीमतों में आग! मांग नहीं, फिर भी लगातार बढ़ रहे दाम, जानें आज के भाव… Continue reading सूर्य ग्रहण : शनि जयंती के दिन लगेगा इस साल का पहला सूर्य ग्रहण, जानें सूर्य ग्रहण लगने के कारण और मान्यताएं..

BENIFITS OF TULSI: तुलसी की माला पहनने से मानसिक स्वास्थ्य रहता है उत्तम..आएये जानते है इसके फायदे

नई दिल्‍ली: हिंदू धर्म में तुलसी का बहुत महत्‍व है। प्रत्येक घर में तुलसी का एक पौधा तो मिल हा जाएगा। रोजाना तुलसी को जल चढ़ाने, शाम को तुलसी के पौधे के नीचे दीपक लगाने से लेकर तुलसी खाने और उसकी माला पहनने तक इससे जुड़ी कई चीजें भारतीय परंपरा का अहम हिस्‍सा हैं।लेकिन रविवार के दिन तुलसी की पुजा नहीं की जाती है।  वैज्ञानिक लिहाज से भी तुलसी के कई फायदे हैं। आज तुलसी से जुड़े एक ऐसे ही लाभ की बात करते हैं जो व्‍यक्ति के मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य से जुड़ा है। यह कनेक्‍शन तुलसी की माला पहनने और उससे मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य बेहतर होने का है। आमतौर पर भगवान विष्णु और कृष्ण के भक्त तुलसी के बीजों की माला धारण किए हुए नजर आते हैं। इसे भी पढ़ें क्या आपको पता है मोबाइल फोन के सिम कार्ड कोने से कटे हुए क्यों होते है?? 2 तरह की होती है तुलसी तुलसी मोटे तौर पर 2 तरह की होती है- श्यामा तुलसी और रामा तुलसी।  श्यामा तुलसी के बीजों की माला पहनने से मानसिक शांति मिलती है और मन में पॉजिटिविटी आती है। इससे आध्यात्मिक के साथ ही साथ पारिवारिक और भौतिक उन्नति भी होती है। यह ईश्वर के प्रति श्रद्धा… Continue reading BENIFITS OF TULSI: तुलसी की माला पहनने से मानसिक स्वास्थ्य रहता है उत्तम..आएये जानते है इसके फायदे

अस्थि विसर्जन के बाद शवों का विसर्जन, अब गंगा हुई मैली..वैज्ञानिकों के लिए बना चिंता का विषय

हिंदु धर्म में आस्था का प्रतीक है मां गंगा।  मां गंगा का पानी सबसे पवित्र और स्वच्छ माना जाता है।  वाराणसी में गंगा के पानी इन दिनों हरा हो गया है। पिछले कुछ दिनों से गंगा के पानी में भारी मात्रा में शैवाल आ जाने के कारण पानी का रंग हरा हो गया है।  इसे लेकर लोगों में तरह-तरह की आशंकाए बनी गई हैं। गंगा नदी का पानी रहा हो जाने से वाराणसी के लोगों में तरह-तरह की चर्चा बनी हुई है। स्थानीय लोगों के अनुसार शैवाल के जमा होने से गंगा के प्रवाह में कमी आई है और पानी का रंग बदल गया है। गंगा नदी का यह बदलता हुआ रंग इसमें रहने वाले जीवों के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। गंगा में शैवाल की बड़ी मात्रा को देखते हुए केंद्रीय प्रदूषण बोर्ड के अधिकारी जांच में जुट गए हैं। केंद्रीय प्रदूषण बोर्ड के अधिकारी यह पता लगाने की कोशिश में लगे है कि गंगा नदी का पानी हरा होने के पीछे क्या कारण है? मान्यता है कि पापनाशिनी गंगा में एक बार सच्चे मन से डुबकी लगाने से मनुष्य के सारे पाप धुल जाते है। जिस गंगा मां का पानी सदैव शुद्ध रहा करता था ऐसा कहते… Continue reading अस्थि विसर्जन के बाद शवों का विसर्जन, अब गंगा हुई मैली..वैज्ञानिकों के लिए बना चिंता का विषय

ये तो हद है !  उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में गंगा किनारे रेत में दफन किये 100 से ज्यादा शव

Prayagraj: कुछ दिन पहले ही गंगा नदी में तैरते शवों से देशभर में हड़कंप मच गया था. उस मुद्दे पर बिहार और उत्तर प्रदेश के स्थानीय प्रशासन आपस में एक दूसरे को आरोप लगाते हुए नजर आए थे. अब एक बार फिर से उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में भी गंगा नदी के तटों पर रेत में शवों को दफनाए जाने का मामला सामने आया है. इस संबंध में मिल रही जानकारी के अनुसार प्रयागराज स्थित गंगा के किनारे पिछले डेढ़ महीने में सैकड़ों शवों को नदी के किनारे रेत में दफन कर दिया गया है. इतना ही नहीं ऋतु में शव को दफन करने का सिलसिला अभी भी जारी है. शवों को दफन करने के बाद बांस से घेराबंदी प्रयागराज में गंगा किनारे शवों के दफनाए जाने का मामला सामने आने के बाद एक बार फिर देश में हड़कंप मच गया है. इस मामले में स्थानीय सूत्रों से आ रही जानकारी के अनुसार शव को दफन करने के बाद उसके चारों और बांस की घेराबंदी कर दी गई है. सूत्रों का कहना है कि यह घेराबंदी इसीलिए की गई है ताकि लोगों को पता चले कि यहां सब को दफन किया गया है. बता दे कि हिंदू धर्म में शवों… Continue reading ये तो हद है ! उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में गंगा किनारे रेत में दफन किये 100 से ज्यादा शव

नरेंद्र कोहली और संघ परिवार

RSS and Narendra Kohli | छः वर्ष पहले नरेंद्र कोहली के 75वें जन्म-दिन पर दिल्ली में एक सुंदर कार्यक्रम हुआ  था। आयोजन हिन्द पॉकेट बुक्स और वाणी प्रकाशन द्वारा संयुक्त था। दोनों बड़े प्रकाशक हैं, इसलिए यह मूलतः हिन्दी पाठकों द्वारा दिया गया सम्मान था। कोहली जी के पाठकों की संख्या इतनी बड़ी है कि प्रकाशकों ने अपने लाभांश का एक भाग आयोजन के लिए खुशी-खुशी अर्पित किया। लेखक की एक बड़ी कसौटी उस के पाठक ही होते हैं। किसी आइडियोलॉजी या आलोचकों के फैसले नहीं। कोई पार्टी, मतवाद, आदि पोषित कर, प्रचारकों के गुट का मुँह देखकर कोई साहित्यकार कहला तो सकता है, बन नहीं सकता। पर उस आयोजन में भी खटका था कि जिन नरेंद्र कोहली को ‘हिन्दुत्ववादी’ कहकर वामपंथी बुद्धिजीवियों, उन की मित्र सरकारों द्वारा सदैव उपेक्षित किया गया, कोहली जी के अध्यापकीय कैरियर को भी चोट पहुँचाई गई – उन्हीं कोहली को सम्मानित करने कथित हिन्दूवादी सरकार का कोई प्रतिनिधि नहीं आया! जबकि कोहली जी संघ-परिवार के दो प्रमुख पत्रों, ‘पाञ्चजन्य’ और ‘राष्ट्रधर्म’, के लंबे समय तक नियमित व्यंग्य-लेखक भी रहे थे। किन्तु सर्वाधिक महत्वपूर्ण बात यह कि कोहली जी के संपूर्ण लेखन, दर्जनों पुस्तकों, सैकड़ों कहानियों तथा व्यंग्य रचनाओं में कोई एक सूत्र अविच्छिन्न है… Continue reading नरेंद्र कोहली और संघ परिवार

CHARDHAM YATRA POSTPOND : कोरोना ने चारधाम यात्रा पर निर्भर व्यापारियो की फिर तोड़ी कमर… सीएम  रावत ने निलंबित की चारधाम यात्रा

हिन्दु धर्म के आस्था का प्रतीक है चारधाम यात्रा। चारधाम की यात्रा उतराखंड में स्थित है-केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री।  हर वर्ष चारधाम की यात्रा में हजारों-लाखों श्रद्धालु अपने भगवान के दर्शन को जाते है। लेकिन इस वर्ष जो भक्तों चारधाम यात्रा पर जाने की सोच रहे है उनके लिए एक बुरी खबर है। कोरोना के इस भयावह माहौल में उतराखंड सीएम  तीरथ सिंह रावत ने इस वर्ष की चार धाम यात्रा रद्द कर दी है। उतराखंड में कोरोना के मामले बढ़ते ही जा रहे है। कुंभ के बाद उतराखंड में कोरोना आग की तरह फैला है। इस वर्ष श्रद्धालु चारधाम यात्रा पर नहीं जा पाएंगे। मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने कहा कि राज्य में कोरोना की स्थिति को देखते हुए चारधाम यात्रा निलंबित की जाती है। सिर्फ पुजारियों को पूजा और बाकी धार्मिक  अनुष्ठान करने की इजाजत होगी। पुजारियों के अलावा किसी भी श्रद्धालु को वहां जाने की अनुमति नहीं होगी। पहले से निर्धारित तिथी पर खुलेंगे चारोंधाम के कपाट। इसे भी पढें मानवता के इंतेहान में कहीं असफल ना हो जाएं..विशेषज्ञों ने जताया मुंबई में तीसरी लहर का अनुमान 14 मई से खुलेंगे चारोधाम चारोंधाम के कपाट मई में खुलेंगे। गंगोत्री और यमुनोत्री के कपाट अक्षयतृतीया के दिन 14… Continue reading CHARDHAM YATRA POSTPOND : कोरोना ने चारधाम यात्रा पर निर्भर व्यापारियो की फिर तोड़ी कमर… सीएम रावत ने निलंबित की चारधाम यात्रा

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