India EU trade deal

  • मौका भारत का, पर चीन बढ़ेगा!

    यूरोपीय संघ से भारत का सौदा एक छप्पर-फाड़ अवसर है। यदि प्रधानमंत्री मोदी गंभीरता से अपने सचिवों से 27 यूरोपीय देशों, ब्रिटेन, न्यूज़ीलैंड आदि के साथ हुए मुक्त व्यापार समझौतों के मुताबिक बाज़ार खुलवाएं, प्रक्रिया-कायदे आसान बनवाएं तो भारत के लिए अवसर ही अवसर हैं। वैसा ही समय है जब चीनी नेता देंग ने अमेरिकी राष्ट्रपति निक्सन से सौदा पटा कर चीन को दुनिया की फैक्ट्री बनाना शुरू किया था। भारत का वैसी फैक्ट्री बनना न संभव है और न ज़रूरी। भारत का लक्ष्य इतना भर रहे कि संभावी 170-180 करोड़ लोगों की आबादी की बेसिक आवश्यकताओं में वह आत्मनिर्भर...

  • यूरोपी संघ से पटरी दूरदृष्टि या परिस्थितिजन्य मोड़?

    भारत की कूटनीति अब भी व्यक्तित्व-केंद्रित और घटनाओं पर प्रतिक्रिया देने वाली है; जबकि यूरोपीय संघ जैसे जटिल साझेदार के लिए संस्थागत धैर्य और निरंतरता चाहिए। ईयू से बातचीत द्विपक्षीय सौदे से आगे की चीज़ है—सत्ताईस देश, यूरोपीय आयोग और एक सघन नियामक ढाँचा इसमें शामिल है। कूटनीति में समय का अपना वजन होता है। भारत का यूरोप की ओर हालिया झुकाव—जो भारत–यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते में दिखाई देता है—किसी लंबी रणनीतिक तैयारी की परिणति कम और हालात के दबाव में लिया गया निर्णय अधिक लगता है। इतिहास बताता है कि यूरोप लंबे समय तक भारत की रणनीतिक सोच...

  • मजबूत संदेश के साथ

    डॉनल्ड ट्रंप के मूड के हिसाब से कभी बंद, तो कभी खुलते अमेरिकी बाजार के दरवाजों से परेशानी के दौर में भारत और ईयू ने उस वार्ता को अंजाम तक पहुंचाया है, जो 19 वर्षों से खिंच रही थी। डॉनल्ड ट्रंप के प्रहार झेल रही दुनिया में भारत और यूरोपियन यूनियन (ईयू) ने मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) करके मजबूत संदेश दिया है। ट्रंप के मूड के हिसाब से कभी बंद, तो कभी खुलते अमेरिकी बाजार के दरवाजों से परेशानी के दौर में दोनों पक्षों ने उस वार्ता को अंजाम तक पहुंचाया है, जो 19 वर्षों से खिंच रही थी। इसके...