ना रुख, ना रणनीति
भारत सरकार की चुप्पी देश में लाचारी का बोध पैदा कर रही है। भारतीय विदेश नीति ऐसे मुकाम पर क्यों आ पहुंची, जिसमें ना कोई स्पष्ट रुख दिखता है, और ना ही देश की स्वतंत्र पहचान की रक्षा करने की कोई रणनीति? पश्चिम एशिया में जारी युद्ध पर विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने संसद के दोनों सदनों में बयान दिया, लेकिन विपक्षी सदस्यों को उस पर सवाल पूछने या स्पष्टीकरण मांगने का मौका नहीं दिया गया। विपक्ष इस बेहद गंभीर संकट पर संसद में बहस चाहता है, लेकिन सत्ता पक्ष को उस पर एतराज है! नतीजतन, सरकार जितना कहना चाहती...