वीज़ा लाइन में हम और हमारे मैनर्स
कुछ दिन पहले यह जानकर एक अजीब-सी संतुष्टि हुई कि भारत भी ब्रिटिश नागरिकों के वीज़ा खारिज करता है। डिनर टेबल पर यही चर्चा छिड़ी थी और प्रतिक्रिया लगभग ‘वाह’ जैसी! किसी ने कहा, “अच्छा है, दिल को थोड़ा सुकून मिलता है कि उन्हें भी रिजेक्शन झेलना पड़ता है।” दूसरे ने उस घायल सभ्यतागत गर्व के साथ सिर हिलाया, जो वर्षों से एम्बेसी काउंटरों और संदेहभरी निगाहों का अभ्यस्त हो चुका है। “वैसे भी वे हमें ऐसे देखते हैं जैसे हर भारतीय भीतर ही भीतर वहीं बस जाने की योजना लेकर आया हो।” कुछ क्षणों के लिए टेबल पर वही...